राजस्थान की सियासत में नई हलचल: पहली बार अशोक गहलोत से मिलने पहुंचे सचिन पायलट
जयपुर , Sachin Pilot meets Ashok Gehlot –
राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब कांग्रेस नेता और AICC महासचिव सचिन पायलट पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जयपुर स्थित सिविल लाइंस आवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लगभग दो घंटे तक चली यह मुलाकात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
यह मुलाकात पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के निमंत्रण को लेकर हुई। सचिन पायलट ने गहलोत को इस आयोजन में शामिल होने का न्यौता दिया, जो 11 जून को दौसा के समीप भंडाना-जीरोता स्थित राजेश पायलट स्मारक पर आयोजित किया जाएगा।
गहलोत बोले – “राजेश पायलट का दर्द आज भी जीवित”
मुलाकात के बाद अशोक गहलोत ने कहा,
“AICC महासचिव सचिन पायलट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. श्री राजेश पायलट जी की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने का आमंत्रण दिया। मैं और राजेश जी 1980 में पहली बार लोकसभा पहुंचे थे और लगभग 18 वर्षों तक संसद में साथ रहे। उनके असामयिक निधन का दुख आज भी मन को पीड़ा देता है।”
गहलोत के इस बयान को पार्टी में पुराने रिश्तों और भावनात्मक जुड़ाव को पुनर्जीवित करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सियासी तनाव के बाद पहली बार आमने-सामने
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक खटास बनी हुई थी। मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद के बाद पायलट को उपमुख्यमंत्री पद तो मिला, लेकिन कुछ ही समय में मतभेद सार्वजनिक हो गए थे। इससे कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में गुटबाजी भी गहराई थी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हर वर्ष होने वाली पुण्यतिथि सभा में गहलोत या उनके करीबी नेता कम ही नजर आते थे। मगर इस बार सचिन पायलट द्वारा आमंत्रण के लिए खुद गहलोत से मिलना और उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया को राजस्थान कांग्रेस में एक संभावित सुलह की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
25वीं पुण्यतिथि – एक खास आयोजन
राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि को इस बार विशेष रूप से मनाया जा रहा है। श्रद्धांजलि सभा में सचिन पायलट, रमा पायलट, और पायलट परिवार के सदस्य के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे।
राजेश पायलट, जो लंबे समय तक दौसा से सांसद रहे और केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री जैसे अहम पदों पर रहे, आज भी ‘राम राम सा’ के अपने लोकप्रिय अंदाज के लिए याद किए जाते हैं।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात से कांग्रेस आलाकमान को राजस्थान में पार्टी की एकजुटता का संदेश देने का अवसर मिला है। एक ओर जहां यह मुलाकात पारिवारिक भावनाओं और श्रद्धा का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर इससे सियासी समीकरणों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।
अब निगाहें 11 जून को होने वाले आयोजन पर टिकी हैं – क्या अशोक गहलोत कार्यक्रम में शामिल होकर एकता का नया अध्याय लिखेंगे? क्या यह मुलाकात कांग्रेस में टूटती कड़ियों को जोड़ने का माध्यम बनेगी?
सियासत की इस मुलाकात ने एक बात तो स्पष्ट कर दी है – राजस्थान की राजनीति में अभी बहुत कुछ लिखा जाना बाकी है।