वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत CSR कार्यशाला आयोजित – कॉर्पोरेट सहभागिता से होगा जल संरक्षण को बढ़ावा
ब्यावर । राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान (5 जून से 20 जून 2025) के अंतर्गत जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए आज ब्यावर में जिला प्रशासन की ओर से एक दिवसीय CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान 2.2 के अंतर्गत अनुमोदित कार्यों के लिए निजी क्षेत्र से वित्तीय सहायता प्राप्त करना तथा उन्हें इस दिशा में प्रेरित करना रहा।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खडगावत ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, इसमें समाज के हर वर्ग विशेषकर कॉर्पोरेट क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि CSR की भागीदारी के तहत जिले में तैयार की गई कार्य योजना के अनुरूप किसी भी ग्राम विशेष की सम्पूर्ण योजना अथवा उसकी विशिष्ट गतिविधियों को संबंधित विभागों के तकनीकी मार्गदर्शन में स्वयं के स्तर पर क्रियान्वित किया जा सकता है। कॉर्पोरेट संस्थाएं अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन के तहत जिले, ब्लॉक या किसी ग्राम को गोद लेकर उसमें जल संरक्षण से संबंधित स्वीकृत कार्यों का निष्पादन कर सकती हैं।
डॉ. खडगावत ने यह भी बताया कि ऐसी संस्थाएं उन प्रस्तावित कार्यों में भी आर्थिक सहयोग दे सकती हैं, जिनमें वित्तीय अभाव है। इस हेतु मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान 2.0 समिति के लिए पंजाब नेशनल बैंक, शाखा नेहरू प्लेस, जयपुर में एक समर्पित पूल खाता खोला गया है। CSR मद से प्राप्त राशि इस खाते में जमा करवाई जा सकती है।
जिला कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि CSR के तहत इच्छुक संस्थाएं जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कार्यों की सूची में से किसी भी परियोजना या कार्य का चयन अपनी सुविधा एवं रुचि अनुसार कर सकती हैं। वे न केवल कार्यों के वित्तपोषण हेतु सहयोग कर सकती हैं, बल्कि उनके क्रियान्वयन या पर्यवेक्षण (या दोनों) के लिए अपने प्रतिनिधि भी नियुक्त कर सकेंगी।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में अधीक्षण अभियंता, जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग, एस. एल. जांगिड़ ने CSR के माध्यम से कराए जा सकने वाले कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन कार्यों में पक्के एनीकट, मिनी परकोलेशन टैंक, परकोलेशन टैंक, कंटिन्युएस कंटूर ट्रेंच, स्टेगर्ड ट्रेंच, रूफ-टॉप वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, टांका तथा चरागाह विकास जैसे महत्वपूर्ण जल संरक्षण उपाय सम्मिलित हैं।
इस अवसर पर उपखंड अधिकारी दिव्यांश सिंह व विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला में कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को जल संरक्षण में भागीदारी के अवसरों एवं प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।