9 माह बाद शाहपुरा नगर परिषद बनी तृतीय श्रेणी की पालिका

9 माह बाद शाहपुरा नगर परिषद बनी तृतीय श्रेणी की पालिका
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सरकार ने 9 माह बाद शाहपुरा नगर परिषद का दर्जा छीना।


शाहपुरा में अब तृतीय श्रेणी की होगी नगर पालिका।


आमजन में असंतोष की लहर।


विकास की गति को रोकी जनता देगी इसका जवाब- जनता का आरोप।
शाहपुरा 9 जुलाई- देव कृष्ण राज पाराशर।
राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं विशिष्ठ शासन सचिव इंद्रजीत सिंह द्वारा नवीन जिला सृजन के प्रत्याहरण के बाद शाहपुरा नगर परिषद को तृतीय श्रेणी की नगर पालिका में अवनयन (डाउनग्रेड) कर दिये जाने के आदेश को लेकर शाहपुरा (भीलवाड़ा) के निवासियों में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। सरकार का यह निर्णय स्थानीय लोगों व नगर के विकास और भविष्य के लिए एक गलत कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 के बजट सत्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने शाहपुरा को जिला बनने की घोषणा की थी। जिला बनने के बाद सितम्बर 2024 को सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने शाहपुरा नगर पालिका को नगर परिषद में क्रमोन्नत कर दिया। 9 माह बाद ही सरकार ने शाहपुरा नगर परिषद का दर्जा समाप्त कर तृतीय श्रेणी की नगर पालिका में अवनयन के किया। इस आदेश की भनक लगते ही नगरवासियों में सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा देखा जा रहा है।
यह पड़ेगा असर:-
विकास कार्यों पर:
परिषद के पास तृतीय श्रेणी की नगर पालिका अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार होते थे। अवनयन के बाद, शाहपुरा को मिलने वाला बजट और विकास योजनाओं का दायरा सीमित हो जाएगा, जिससे सड़के, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रभावित होगा।
प्रशासनिक स्वायत्तता में कमी: तृतीय श्रेणी की नगर पालिका बनने से अब स्वायत्त निर्णय लेने की शक्ति कम होगी। कई निर्णयों के लिए उच्च प्रशासनिक स्तरों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
आर्थिक प्रभाव: परिषद रहता तो शाहपुरा रीको (औद्योगिक क्षेत्र) में उद्योग लगते अब अवनयन से व्यापार, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
परिषद के सभी पद रिक्त थे: सूत्रों ने बताया कि परिषद बनने के बाद राजस्व अधिकारी, लेखाकार, सचिव अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता के सभी पद रिक्त थे। हां, परिषद बनने के बाद जनप्रतिनिधियों, सभापति, पार्षदों का भत्ता जरूर बढ़ गया था।
इनका कहना है:
सरकार ने किया कुठाराघात: कांग्रेस सरकार ने शाहपुरा को जिला बनाया था। भाजपा सरकार ने शाहपुरा की जनता के साथ अत्याचार करते हुए पहले जिले का दर्जा समाप्त किया और अब परिषद को तोड़ा। जबकि क्षेत्रीय विधायक, नगर सभापति भाजपा के होने के बाद भी इन जनप्रतिनिधियों ने यानी जिला बचाने में पैरवी नहीं कर जनता का विश्वास तोड़ा है। बाल मुकंद तोषनीवाल, कांग्रेस नगर अध्यक्ष, शाहपुरा।
सरकार ने हमारे सपनों और विकास की उम्मीदों पर कुठाराघात कर छला है। इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। आने वाले चुनावों में नगरवासी सबक सिखाएंगे। अब हमारा शहर फिर से पिछड़ जाएगा। रचना मिश्रा, प्रतिपक्ष नेता नगर परिषद, शाहपुरा
यह सरकार का फैसला है। नगर परिषद रहती तो नगर विकास के आयामों से जुड़ता। हम सरकार से पुनः जिला बनाने के साथ नगर परिषद बनाने की मांग करेंगे। हमें विश्वास है कि आने वाले समय में सरकार सब अच्छा करेगी। रघुनंदन सोनी, सभापति,नगर परिषद, शाहपुरा।
जिला समाप्त हुआ, कई जिलास्तरीय विभाग भी टूटे है। वहीं सरकार ने नीतियों के अनुरूप यह निर्णय लिया। क्षेत्र की देवतुल्य नागरिकों की जनभावनाओं को मैंने सरकार से जिले को पुनः बहाल करने करने पर पुनर्विचार करने का विनम्रता से आग्रह किया है। फिर भी मैं नगर के विकास के लिए सरकार की लाभकारी परियोजनाओं को शाहपुरा में लाने का स्वयं प्रयास करूंगा। लालाराम बैरवा विधायक, शाहपुरा

Dev Krishna Raj Parashar - Shahpura

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