पिता की अर्थी को पुत्री ने दिया कंधा। मुखाग्नि देकर निभाया बेटे का फर्ज।

शाहपुरा के राजपरिवार सहित क्षेत्र में शोक छाया।
पिता की अर्थी को पुत्री ने दिया कंधा।
मुखाग्नि देकर निभाया बेटे का फर्ज।
पुष्पचक्र चढ़ाकर लोगों ने किया नमन।
शाहपुरा 14 सितंबर 2025। राजपरिवार के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर के राइफल शूटर शत्रुजीत सिंह (62) के निधन पर रविवार को राज परिवार सहित नगर व आसपास क्षेत्र में शोक छाया छाया रहा। रविवार को दिवंगत सिंह का पार्थिक शरीर को आमजन के लिए दर्शनार्थ हेतु रेतिया बाग में रखा गया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश आचार्य रामदयाल ने शत्रुजीत सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। रामनिवास धाम की ओर से शॉल, पुष्पमाला भेजकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मेवाड़, मारवाड़ सहित राजस्थान के विभिन्न ठिकानों से आए लोगों ने अर्थी पर पुष्पचक्र अर्पित कर नमन किया। वहीं कई संगठनों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में क्षेत्र के महिला, पुरुष यहां तक बच्चों तक ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
पिता की अर्थी को कंधा देखकर, दी मुखाग्नि:- रेतिया बाग पैलेस से शुरू हुई अंतिम यात्रा के समय पिता की अर्थी को कंधा देती हुई उनकी पुत्री त्रिशा सिंह रामद्वारा में स्थित श्मशानघाट पहुंची। दिवंगत शत्रुजीत सिंह के पुत्र नहीं होने से पुत्री त्रिशा ने बेटे का फर्ज निभाते हुए साहस और निष्ठा के साथ पिता की अंतिम यात्रा को पूर्णकर अपने चाचा जयसिंह के साथ पिता की चिता को मुखाग्नि दी। त्रिशा ने राजपूत परंपराओं में बेटी के रूप में एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया। यह मार्मिक दृश्य सभी के लिए प्रेरणादायक रहा। पंडितों, आर्य समाज की ओर से वैदिक मंत्रों के साथ परिजनों ने आहुतियां प्रदान की।
इस अंतिम यात्रा में राजपरिवार के मुखिया और शत्रुजीत के भ्राता जयसिंह शाहपुरा, जोधपुर, पाली, डूंगरपुर, बनेड़ा, देवगढ़, कोटा, कोयला, अजमेर, देवलिया, उदयपुर, खामोर, रामतरा, सवाईमाधोपुर सहित विभिन्न राजघरानों के सदस्यों एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए।
शत्रुजीत सिंह की सादगी, सेवा भावना और राइफल शूटिंग व वन्यजीव फोटोग्राफी में योगदान को लोगों ने याद किया।
