अजमेर जिला प्रमुख पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित, भाजपा-कांग्रेस में बढ़ी दावेदारों की हलचल
अजमेर जिला प्रमुख पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित, भाजपा-कांग्रेस में बढ़ी दावेदारों की हलचल
‘एक अनार, सौ बीमार’ जैसी स्थिति, दोनों प्रमुख दलों के सामने मजबूत दावेदार चुनने की चुनौती
अजमेर। अजमेर जिला परिषद के जिला प्रमुख पद को इस बार सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण की घोषणा के साथ ही जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सामान्य महिला के लिए सीट आरक्षित होने के बाद अब किसी भी सामान्य वर्ग की महिला को चुनाव मैदान में उतरने का अवसर मिल सकता है, ऐसे में दोनों दलों के सामने दावेदारों की लंबी सूची में से मजबूत चेहरा चुनने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आवाज राजस्थान की ने पहले भी यह प्रमुखता से बताया था कि अजमेर जिला परिषद में पिछले 21 वर्षों से जिला प्रमुख के पद पर महिला ही काबिज होती आ रही है। इस बार भी महिला के लिए पद आरक्षित होने से अजमेर के नाम एक अलग राजनीतिक रिकॉर्ड जुड़ने की स्थिति बन गई है।
आरक्षण ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी
सामान्य महिला के लिए जिला प्रमुख का पद आरक्षित होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामान्य वर्ग की सीट होने के कारण दावेदारों का दायरा भी बढ़ गया है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में ‘एक अनार, सौ बीमार’ वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है।
अजमेर जिले में ओबीसी वर्ग की भी बड़ी राजनीतिक भागीदारी है। इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग से भी पंचायतीराज की राजनीति में सक्रिय महिला दावेदार अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर सकती हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों को जातीय समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन, राजनीतिक अनुभव, संगठन में सक्रियता और चुनावी जीत की क्षमता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।
दो दर्जन से अधिक नाम चर्चा में
जिला प्रमुख पद के लिए राजनीतिक हलकों में अभी से संभावित चेहरों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। प्राप्त राजनीतिक आकलन के अनुसार दो दर्जन से अधिक महिला दावेदारों के नाम संभावित रूप से चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर चुनाव प्रक्रिया और पार्टी स्तर पर प्रत्याशियों के चयन के बाद ही साफ होगी।
भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इतने दावेदारों में से किसे मैदान में उतारा जाए। टिकट वितरण के साथ ही दोनों दलों में अंदरूनी समीकरण और राजनीतिक सक्रियता और तेज होने की संभावना है।
किसके सिर सजेगा जिला प्रमुख का ताज?
अब नजर इस बात पर है कि भाजपा और कांग्रेस में से कौन-सा दल मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतरता है और किस महिला दावेदार को जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचने का मौका मिलता है। आरक्षण ने दावेदारों के लिए रास्ता तो खोल दिया है, लेकिन अंतिम बाजी किसके हाथ लगेगी, यह चुनाव परिणाम ही तय करेंगे।
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