राजस्थान शिक्षक तबादला: जनगणना ड्यूटी के कारण 1.6 लाख कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक
जयपुर – राजस्थान में लंबे समय से अपने तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। प्रदेश में आगामी जनगणना की तैयारियों के चलते राजस्थान शिक्षक तबादला प्रक्रिया पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सरकार ने जनगणना कार्य के लिए प्रदेश भर में करीब 1 लाख 60 हजार प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या सरकारी शिक्षकों की ही है। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए इन सभी कर्मचारियों के तबादलों पर अब लंबे समय तक रोक लगने के पूरे आसार बन गए हैं।
भारत में आगामी जनगणना की तैयारियां अब जोरों पर शुरू हो चुकी हैं। राजस्थान में इस जनगणना का पहला चरण 1 मई से शुरू होने जा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा। इस प्रक्रिया में 1 मई से 15 मई तक आम जनता को स्वगणना का एक नया विकल्प दिया गया है, जिसके तहत परिवार खुद एक वेब पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक नियुक्त किए गए प्रगणक घर-घर जाकर इस गणना के काम को पूरा करेंगे। इसी मैदानी कार्य के लिए प्रदेश के लाखों शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जिसके चलते उनका राजस्थान शिक्षक तबादला अब खटाई में पड़ता हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने इस पूरी स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया है कि राज्य में नियुक्त किए गए अधिकांश प्रगणक और पर्यवेक्षक शिक्षा विभाग के ही वरिष्ठ शिक्षक और शिक्षक हैं। एक प्रगणक को लगभग 150 मकानों का दायित्व सौंपा गया है। कार्य की निरंतरता और सटीकता बनाए रखने के लिए यह बहुत जरूरी है कि जो कर्मचारी पहले चरण में शामिल हो रहे हैं, वे ही फरवरी 2027 से शुरू होने वाले दूसरे चरण में भी अपनी सेवाएं निरंतर देते रहें। इसी तकनीकी कारण को देखते हुए निदेशालय की तरफ से राज्य सरकार से यह विशेष अपील की गई है कि जनगणना ड्यूटी में शामिल सभी महत्वपूर्ण कार्मिकों के तबादलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाए।
इस पूरी विभागीय समय सारिणी पर गौर करें तो जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक पूरा होना प्रस्तावित है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के विधिवत संपन्न होने तक, यानी कम से कम अप्रैल 2027 तक, प्रदेश के इन लाखों शिक्षकों के ट्रांसफर पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू रह सकता है। जो शिक्षक पिछले काफी समय से सरकार से अपने घर वापसी या मनचाहे स्थानांतरण की राह देख रहे थे, उन्हें अब एक लंबा और उबाऊ इंतजार करना पड़ेगा। प्रशासन का पूरा ध्यान फिलहाल इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को बिना किसी रुका