चरागाह से होगी कमाई: हुरड़ा में 35 बीघा में विकसित होगा पंचफल उद्यान, ग्रामीण रेस्टोरेंट भी बनेगा
भीलवाड़ा। चरागाह भूमि के संरक्षण के साथ ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने की दिशा में हुरड़ा पंचायत समिति ने एक अनूठी पहल की है। क्षेत्र में करीब 35 बीघा भूमि पर पंचफल एवं चरागाह विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत पांच प्रकार के फलदार पौधों का उद्यान विकसित किया गया है, जहां भविष्य में फलों की नीलामी, पौध बिक्री और ग्रामीण रेस्टोरेंट के माध्यम से पंचायत को नियमित आय प्राप्त होगी। साथ ही चरागाह भूमि को अतिक्रमण से भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
परियोजना के तहत एप्पल बेर, अमरूद, आंवला, आम और नींबू के कुल 2,000 फलदार पौधे लगाए गए हैं। प्रत्येक प्रजाति के लिए अलग-अलग ब्लॉक विकसित किए गए हैं, जिससे उद्यान का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जा सके। इसके अलावा परिसर की चारदीवारी के किनारे करीब 200 नीम के पौधे भी लगाए गए हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने में सहायक होंगे।
ड्रिप सिंचाई और सोलर पंप की व्यवस्था
पौधों के संरक्षण और सिंचाई के लिए परियोजना में ट्यूबवेल, ड्रिप इरीगेशन सिस्टम और सोलर पंप लगाए गए हैं। इससे कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव होगी और संचालन लागत भी कम आएगी। परिसर में जल टंकी और स्टोर रूम की भी व्यवस्था की गई है।
रेस्टोरेंट की आय से होगा रखरखाव
परियोजना की विशेषता यह है कि इसे केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रखा गया है। पौधों के दीर्घकालीन रखरखाव के लिए परिसर में ग्रामीण रेस्टोरेंट विकसित किया जा रहा है। रेस्टोरेंट से होने वाली आय उद्यान और चरागाह के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। वहीं, फल उत्पादन शुरू होने के बाद उनकी नीलामी से भी ग्राम पंचायत को नियमित राजस्व प्राप्त होगा।
चरागाह भी रहेगा सुरक्षित
करीब 1000 फीट लंबाई और 600 फीट चौड़ाई वाले इस परिसर में दक्षिणी हिस्से में 800 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा क्षेत्र चरागाह के रूप में सुरक्षित रखा गया है। इससे पशुपालकों को चारे की सुविधा मिलेगी और चरागाह भूमि पर अतिक्रमण की आशंका भी कम होगी।
यह मॉडल भविष्य में अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकेंगे।