पंचायतों को बड़ी राहत: 2 लाख तक की भूमि नीलामी के लिए नहीं लेनी होगी मंजूरी
जयपुर। राजस्थान सरकार ने पंचायतों की भूमि नीलामी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए पंचायतों के अधिकारों का दायरा बढ़ा दिया है। अब पंचायतों को 2 लाख रुपए तक की सबसे ऊंची बोली वाली भूमि की नीलामी के लिए उच्च स्तर से पूर्व मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले यह सीमा केवल 50 हजार रुपए तक थी।
राज्य सरकार ने राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154 में संशोधन किया है। करीब 15 साल पुराने प्रावधानों में बदलाव के बाद नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब राज्य में पंचायती राज चुनाव की तैयारियां चल रही हैं।
2 लाख से ऊपर की नीलामी पर अलग-अलग स्तर पर मंजूरी
नए नियमों के अनुसार भूमि नीलामी में प्राप्त सबसे ऊंची बोली की राशि के आधार पर मंजूरी की व्यवस्था तय की गई है—
- 2 लाख रुपए तक: पंचायत स्वयं नीलामी प्रक्रिया पूरी कर सकेगी, किसी पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं।
- 2 लाख से अधिक से 5 लाख रुपए तक: संबंधित पंचायत समिति से पूर्व मंजूरी आवश्यक होगी।
- 5 लाख से अधिक से 10 लाख रुपए तक: संबंधित जिला परिषद की पूर्व मंजूरी लेनी होगी।
- 10 लाख रुपए से अधिक: राज्य सरकार से पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
सरकार का मानना है कि छोटी राशि की भूमि नीलामी के मामलों में बार-बार उच्च स्तर की स्वीकृति लेने की प्रक्रिया समाप्त होने से पंचायत स्तर पर निर्णय तेजी से हो सकेंगे। वहीं अधिक मूल्य की भूमि के मामलों में पंचायत समिति, जिला परिषद और राज्य सरकार की निगरानी बनी रहेगी।
नियम 157 और 160 में भी बदलाव
सरकार ने केवल नियम 154 में ही नहीं, बल्कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 और नियम 160 में भी संशोधन किया है।
नियम 157 में पहले शामिल ‘प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और 2023’ के स्थान पर अब ‘ग्रामीण सेवा शिविर 2026’ अथवा पंचायती राज विभाग या राजस्व विभाग की ओर से किसी भी नाम से आयोजित शिविरों को शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों को कम मूल्य की भूमि नीलामी के मामलों में अधिक प्रशासनिक स्वायत्तता मिलेगी और मंजूरी की लंबी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।