टिकट पाना है तो QR कोड स्कैन करिए, राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने लागू किया नया सिस्टम
जयपुर। राजस्थान में आगामी निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने टिकट वितरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं और कार्यकर्ताओं को टिकट के लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। पार्टी ने दावेदारों के लिए QR कोड आधारित ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था शुरू की है।
कांग्रेस का दावा है कि नई डिजिटल व्यवस्था से टिकट वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी दावेदारों का एक समान मापदंड पर मूल्यांकन किया जा सकेगा।
QR कोड स्कैन करते ही खुलेगा आवेदन पोर्टल
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने निकाय चुनावों के लिए टिकट दावेदारी की नई ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की। इच्छुक उम्मीदवारों को जारी किए गए QR कोड को स्कैन कर ऑनलाइन पोर्टल पर पहुंचना होगा, जहां वे अपनी दावेदारी दर्ज कर सकेंगे।
इस व्यवस्था के तहत पारंपरिक सिफारिशों के बजाय निर्धारित डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से टिकट के लिए आवेदन किया जाएगा।
6 चरणों में देनी होगी पूरी जानकारी
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को कुल 6 चरणों में पूरा किया जाएगा। आवेदन पत्र में दावेदारों से संबंधित स्थानीय निकाय का नाम, वार्ड संख्या और व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाएगी।
इसके साथ ही राजनीतिक पृष्ठभूमि, सामाजिक गतिविधियां, जनसंपर्क, संगठनात्मक अनुभव और संबंधित वार्ड की प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी भी आवेदन में दर्ज करनी होगी।
सोशल मीडिया भी बनेगा टिकट चयन का आधार
कांग्रेस ने इस बार टिकट चयन प्रक्रिया में सोशल मीडिया की सक्रियता को भी शामिल किया है। टिकट के दावेदारों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स, उनकी सक्रियता और फॉलोअर्स से संबंधित जानकारी आवेदन के दौरान देनी होगी।
माना जा रहा है कि डिजिटल उपस्थिति के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सक्रियता, जनसंपर्क और संगठनात्मक अनुभव का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान में मिलेगी मदद
डोटासरा ने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने से टिकट वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और दावेदारों का मूल्यांकन तय मानकों के आधार पर किया जा सकेगा। नई डिजिटल व्यवस्था से पार्टी को स्थानीय स्तर पर सक्रिय और जनाधार रखने वाले कार्यकर्ताओं की पहचान करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान में निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस का यह नया प्रयोग टिकट वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।