समाजसेवी कानसिंह इंदा के जन्मोत्सव के अवसर पर मुस्लिम बालिकाओं ने अपनी जमापूंजी का गुल्लक भेंट कर जताया स्नेह, इंदा बोले: इस ऋण को जीवनभर नहीं चुका सकता
समाजसेवी कानसिंह इंदा के जन्मोत्सव के अवसर पर मुस्लिम बालिकाओं ने अपनी जमापूंजी का गुल्लक भेंट कर जताया स्नेह, इंदा बोले: इस ऋण को जीवनभर नहीं चुका सकता
- समाजसेवी एवं भाजपा नेता इंदा के जन्मोत्सव पर भावुक कर देने वाला पल
बर मारवाड़ । समाजसेवी एवं भाजपा नेता कानसिंह इंदा के जन्मोत्सव के अवसर पर उस समय माहौल भावुक हो गया, जब मुस्लिम समाज की बालिकाओं ने अपने मन में संजोई छोटी-छोटी बचत की जमापूंजी का गुल्लक उन्हें जन्मदिन की भेंट के रूप में समर्पित किया। बालिकाओं की इस आत्मीय पहल ने जन्मदिन समारोह में मौजूद सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। जन्मोत्सव के अवसर पर बालिकाएं अपने हाथों में गुल्लक लेकर इंदा के पास पहुंचीं। गुल्लक में उनके द्वारा लंबे समय से बचाए गए पैसे थे। बालिकाओं ने यह गुल्लक किसी औपचारिकता के लिए नहीं बल्कि अपने स्नेह, सम्मान और अपनत्व की भावना से इंदा को भेंट किया। मासूम बालिकाओं की इस अनूठी भेंट को देखकर इंदा कुछ क्षणों के लिए भावुक हो गए।
इंदा ने बालिकाओं से गुल्लक स्वीकार करते हुए कहा कि उनके लिए यह भेंट किसी भी महंगे उपहार से कहीं अधिक मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि “इन बालिकाओं ने अपनी छोटी-छोटी खुशियों और जरूरतों के लिए बचाई गई जमापूंजी मुझे स्नेहपूर्वक भेंट की है। यह मेरे लिए केवल एक गुल्लक नहीं, बल्कि इनके अपार प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक है। इस ऋण को मैं जीवनभर नहीं चुका सकता।” उन्होंने कहा कि समाज में रिश्ते केवल खून के संबंधों से नहीं बनते, बल्कि प्रेम, विश्वास और सेवा की भावना से भी बनते हैं। बालिकाओं द्वारा अपनी बचत का गुल्लक भेंट करना उनके प्रति समाज के विश्वास और आत्मीयता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान और स्नेह उनके लिए हमेशा स्मरणीय रहेगा।
इंदा ने बालिकाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जीवन का उद्देश्य समाज के हर वर्ग के लोगों के बीच आपसी भाईचारा, सौहार्द और विश्वास को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी समाज की अमूल्य धरोहर होती हैं और उनका स्नेह व आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
इस दौरान उपस्थित लोगों ने भी बालिकाओं की इस पहल की सराहना की। लोगों का कहना था कि जन्मदिन पर महंगे उपहार देने के बजाय अपनी मेहनत और बचत से जोड़ी गई जमापूंजी का गुल्लक भेंट करना बालिकाओं की भावनात्मक सोच और इंदा के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। जन्मोत्सव का यह प्रसंग समारोह के अन्य आयोजनों से अलग एक ऐसी यादगार तस्वीर बन गया। जिसमें स्नेह, सद्भाव, सामाजिक समरसता और मानवीय रिश्तों की खूबसूरत झलक देखने को मिली। मुस्लिम बालिकाओं की इस आत्मीय भेंट ने यह संदेश भी दिया कि प्रेम और सम्मान की कोई जाति या मजहब नहीं होता।