अजमेर जिला परिषद वार्ड नम्बर 03: कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस, बदलते रहे चुनावी समीकरण
अजमेर। अजमेर जिला परिषद का वार्ड नम्बर 03 राजनीतिक दृष्टि से हमेशा ही महत्वपूर्ण और दिलचस्प रहा है। इस वार्ड की खासियत यह रही है कि यहां किसी एक राजनीतिक दल का लगातार दबदबा कायम नहीं रहा। मतदाताओं ने समय-समय पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को मौका दिया है और प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय पकड़ तथा क्षेत्रीय समीकरणों को भी चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
परिसीमन के बाद इस बार वार्ड का स्वरूप भी बदल गया है। पहले यह वार्ड पुष्कर और नसीराबाद विधानसभा क्षेत्रों के बीच बंटा हुआ था, लेकिन नए परिसीमन के बाद जिला परिषद वार्ड नम्बर 03 पूरी तरह नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र में आ गया है। ऐसे में आगामी चुनाव में पुराने राजनीतिक समीकरणों के साथ नए समीकरण भी देखने को मिल सकते हैं।
सात ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना वार्ड
नए परिसीमन के बाद जिला परिषद वार्ड नम्बर 03 में नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र की रामपुरा डाबला, डोडियाना, पिचोलिया, बुधवाड़ा, मकरेड़ा, केसरपुरा और मांगलियावास ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।
वहीं, नसीराबाद क्षेत्र की दातड़ा तथा पुष्कर विधानसभा क्षेत्र की भावता, डूमाड़ा और सराधना ग्राम पंचायतों को इस वार्ड से अलग कर दिया गया है।
अब वार्ड नम्बर 03 में कुल 07 ग्राम पंचायतें हैं और इनकी कुल जनसंख्या लगभग 32 हजार के आसपास बताई जा रही है। परिसीमन के बाद क्षेत्र पूरी तरह नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र में आने से राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
15 वर्षों में बदले चुनावी परिणाम
वार्ड नम्बर 03 का पिछले करीब डेढ़ दशक का चुनावी इतिहास भी काफी रोचक रहा है। यहां मतदाताओं ने हर चुनाव में अलग राजनीतिक दल को अवसर दिया है।
वर्ष 2010 के चुनाव में भाजपा की सुमन मांडावरिया ने जीत दर्ज की थी। सराधना निवासी सुमन मांडावरिया ने 7,688 मत प्राप्त किए थे और कांग्रेस प्रत्याशी भावना मेघवंशी को करीब 1,125 मतों से पराजित किया था।
इसके बाद वर्ष 2015 में कांग्रेस के हनुमान वैष्णव ने चुनाव जीतकर भाजपा के कब्जे को पलट दिया। हनुमान वैष्णव वर्तमान में इसी वार्ड की मकरेड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच हैं। ऐसे में स्थानीय राजनीति में उनकी पकड़ और क्षेत्र में सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी रहती है।
इसके बाद वर्ष 2021 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर वापसी की। भाजपा के दिलीप पचार ने 7,684 मत प्राप्त कर कांग्रेस के सुरेश आबड़ को करीब 1,751 मतों से हराया था।
इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था। आरएलपी की ओर से राजेश प्रत्याशी रहे।
इन चुनाव परिणामों को देखें तो स्पष्ट है कि वार्ड नम्बर 03 में मतदाताओं ने किसी एक पार्टी को लगातार जीत नहीं दिलाई है। यही कारण है कि आगामी चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए यह वार्ड महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जातीय समीकरण भी रहेंगे महत्वपूर्ण
वार्ड नम्बर 03 में विभिन्न सामाजिक वर्गों की मौजूदगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती रही है। यहां जाट, गुर्जर, रावत, अनुसूचित जाति और राजपूत समाज के मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में निवास करते हैं। इसके अलावा ब्राह्मण सहित अन्य समाजों के मतदाता भी क्षेत्र में हैं।
डोडियाना और बुधवाड़ा ग्राम पंचायतों में गुर्जर समाज के मतदाताओं की अच्छी संख्या बताई जाती है, जबकि केसरपुरा में रावत समाज का प्रभाव माना जाता है।
वहीं रामपुरा डाबला, पिचोलिया, मकरेड़ा और मांगलियावास में जाट समाज के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। इन पंचायतों में अनुसूचित जाति, राजपूत और ब्राह्मण समाज के मतदाता भी मौजूद हैं।
ऐसे में चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की रणनीति केवल पार्टी के आधार पर ही नहीं बल्कि स्थानीय सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर भी तय होना स्वाभाविक है।
आरक्षण पर टिकी निगाहें
वार्ड नम्बर 03 में पिछले चुनावों के दौरान अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण रहा है। वर्ष 2010 में यह वार्ड अनुसूचित जाति महिला, जबकि वर्ष 2015 में ओबीसी के लिए आरक्षित था। वर्ष 2021 में यह वार्ड सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित रहा था।
अब प्रदेश में नए जिलों के गठन और नए सिरे से हुए परिसीमन के बाद इस बार आरक्षण की तस्वीर क्या रहती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि वार्ड नम्बर 03 इस बार अनारक्षित महिला या ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति आरक्षण की आधिकारिक लॉटरी के बाद ही स्पष्ट होगी।
जिला प्रमुख पद का आरक्षण भी बढ़ाएगा उत्सुकता
अजमेर जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने के बाद जिला परिषद सदस्यों के आरक्षण को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
अब संभावित दावेदारों के साथ-साथ भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों की निगाहें जिला परिषद सदस्यों तथा अन्य पदों के लिए होने वाली आरक्षण लॉटरी पर टिकी हुई हैं।
यदि वार्ड नम्बर 03 महिला या ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होता है तो दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों का चयन नए सिरे से करना होगा। ऐसी स्थिति में स्थानीय स्तर पर सक्रिय महिला नेताओं और संभावित दावेदारों की भूमिका बढ़ सकती है।
कौन बदलेगा वार्ड का राजनीतिक इतिहास?
वार्ड नम्बर 03 का इतिहास बताता है कि यहां मतदाता किसी एक दल के साथ लगातार नहीं रहे हैं। वर्ष 2010 में भाजपा, वर्ष 2015 में कांग्रेस और वर्ष 2021 में फिर भाजपा ने जीत दर्ज की।
अब परिसीमन के बाद वार्ड का भौगोलिक स्वरूप बदल चुका है। पहले दो विधानसभा क्षेत्रों में बंटा यह वार्ड अब पूरी तरह नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र में आ गया है। ऐसे में नए परिसीमन का आगामी चुनाव परिणाम पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
क्या भाजपा एक बार फिर अपना कब्जा बरकरार रख पाएगी?
क्या कांग्रेस वापसी करेगी?
या फिर कोई नया राजनीतिक समीकरण इस वार्ड का परिणाम बदल देगा?
इन सवालों के जवाब आगामी चुनाव में ही सामने आएंगे।
आवाज़ राजस्थान की जिला परिषद के वार्डों के राजनीतिक इतिहास, चुनावी समीकरण, परिसीमन, संभावित दावेदारों और पंचायतीराज से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को लगातार आपके सामने लाता रहेगा। पंचायतीराज चुनाव से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें।