पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसके बावजूद पशुपालकों एवं दुग्ध सहकारी संस्थाओं की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है,डेयरी अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने एक बार फिर मजबूती से आवाज़ उठाई है। चौधरी ने प्रदेश के पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगामी बजट 2026-27 में ठोस निर्णय की मांग

पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसके बावजूद पशुपालकों एवं दुग्ध सहकारी संस्थाओं की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है,डेयरी अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने एक बार फिर मजबूती से आवाज़ उठाई है। चौधरी ने प्रदेश के पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगामी बजट 2026-27 में ठोस निर्णय की मांग
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पशुपालकों के हक़ की आवाज़ बने रामचन्द्र चौधरी, मुख्यमंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक को लिखा पत्र
अजमेर।
राजस्थान में पशुपालन एवं दुग्ध सहकारी संस्थाओं से जुड़े लाखों पशुपालकों की समस्याओं को लेकर अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने एक बार फिर मजबूती से आवाज़ उठाई है। चौधरी ने प्रदेश के पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगामी बजट 2026-27 में ठोस निर्णय की मांग करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा को विस्तृत पत्र प्रेषित किया है।
रामचन्द्र चौधरी ने पत्र में उल्लेख किया कि राजस्थान में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसके बावजूद पशुपालकों एवं दुग्ध सहकारी संस्थाओं की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी राज्य सरकार को कई बार पत्र, ज्ञापन एवं प्रतिवेदन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अधिकांश मांगें आज भी लंबित हैं, जिससे प्रदेश के पशुपालकों में भारी निराशा व्याप्त है।
चौधरी ने पत्र में बताया कि प्रदेश की लगभग 13 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां, 23 जिला दुग्ध संघ एवं आरसीडीएफ वर्तमान में अनेक आर्थिक व प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। जिला दुग्ध संघों द्वारा मिड-डे-मील योजना एवं अमृत आहार योजना के तहत सप्लाई किए गए दुग्ध पाउडर की लगभग 300 करोड़ रुपये की बकाया राशि अब तक नहीं मिलने से सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है।
रामचन्द्र चौधरी ने मांग की कि डेयरी एवं पशुपालन को कृषि में सम्मिलित किया जाए, जिससे पशुपालकों को किसानों के समान आपदा प्रबंधन व अन्य योजनाओं का लाभ मिल सके। साथ ही जिला दुग्ध संघों एवं आरसीडीएफ में 2500 रिक्त पदों पर भर्ती, RAS-RPS की तर्ज पर राजस्थान डेयरी सेवा (RDS) के गठन और प्रदेश में बेसहारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में NDDB से 900 रुपये प्रति डोज की दर से मंगवाया जा रहा सेक्स-सॉर्टेड सीमन जिला संघों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है। इसलिए बस्सी फार्म से पंचायत स्तर तक निशुल्क सेक्स-सॉर्टेड सीमन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट्स के आधुनिकीकरण के लिए 5000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान करने और पंचायत स्तर के पशु चिकित्सालयों में चिकित्सक एवं स्टाफ की शीघ्र भर्ती की मांग की गई।
रामचन्द्र चौधरी ने सहकारी लोकतंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रदेश की 13 हजार दुग्ध समितियों, 23 जिला दुग्ध संघों एवं आरसीडीएफ में जिन संस्थाओं के चुनाव देय हैं, उनके चुनाव शीघ्र कराए जाने की घोषणा बजट में की जानी चाहिए।
पत्र में उन्होंने समस्त पशुओं के निशुल्क बीमा, तमिलनाडु सरकार की तर्ज पर प्रत्येक ग्रामीण गृह लक्ष्मी को कामधेनु गाय, उत्तर प्रदेश की तरह पशुओं की संख्या के आधार पर आर्थिक सहायता, तथा पशुपालकों को मनरेगा में सम्मिलित करने की भी मांग रखी।
रामचन्द्र चौधरी ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री, डेयरी मंत्री एवं विपक्ष के नेता इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए बजट 2026-27 में पशुपालकों के हित में ठोस निर्णय करेंगे और प्रदेश की दुग्ध सहकारी व्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे।

admin - awaz rajasthan ki

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