सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत परिसीमन को चुनौती देने वाली एसएलपी खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत परिसीमन को चुनौती देने वाली एसएलपी खारिज की
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हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश में दखल से सर्वोच्च अदालत का इनकार

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायतों का मुख्यालय बदलने सहित 10 जनवरी 2025 की गाइडलाइनों का पालन न करने तथा 20 नवम्बर 2025 व 28 दिसम्बर 2025 की संशोधित अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने जयसिंह की एसएलपी पर यह आदेश सुनाया।

एसएलपी में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के 21 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पंचायतों का मुख्यालय बदलने सहित परिसीमन की अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्य सरकार ने परिसीमन अधिसूचना जारी करते समय वैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया और मुख्यालय की दूरी तथा निवासियों को होने वाली असुविधा के संबंध में दर्ज आपत्तियों का भी समुचित निस्तारण नहीं किया।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने न्यायालय को बताया कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के अनुसार की गई है। उन्होंने बताया कि आपत्तियों पर विचार कर उनका विधिवत निस्तारण किया गया और मंत्रिस्तरीय उपसमिति ने पुनर्गठन को अपनी मंजूरी दी। हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशानुसार पुनर्गठन की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने के लिए 28 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की गई थी।

सरकार ने यह भी बताया कि जनवरी 2026 में सभी पंचायती राज संस्थाओं के वार्डों के गठन का कार्य पूरा कर लिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों के प्रारूप का प्रकाशन करते हुए चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 25 फरवरी 2026 को होना निर्धारित है और प्रदेश में समस्त चुनाव प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अदालत की ओर से हस्तक्षेप करने से परहेज करना चाहिए। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश में दखल देना उचित नहीं है। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और पंचायत चुनाव का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त कर दिया।

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admin - awaz rajasthan ki

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