कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ पर उठे सवाल, जिला अध्यक्षों के चयन मॉडल पर घिरी रणनीति
जयपुर। कांग्रेस द्वारा संगठन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘संगठन सृजन अभियान’ अब सवालों के घेरे में आ गया है। जिला अध्यक्षों के चयन और उन्हें सियासी ताकत देने के इस मॉडल पर हालिया घटनाक्रमों के बाद पार्टी के भीतर ही चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, उड़ीसा में जिला अध्यक्ष बनाए गए दो विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने के बाद इस मॉडल की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी अब इन दोनों नेताओं को पद से हटाने की तैयारी में है। इसके साथ ही गुजरात सहित कई राज्यों में निष्क्रियता के चलते कुछ जिला अध्यक्षों को बदला भी जा चुका है।
संगठन सृजन मॉडल पर बढ़ती चिंताएं
कांग्रेस ने लगातार चुनावी हार के बाद संगठन को पुनर्गठित करने के लिए यह मॉडल अपनाया था। इस पहल के तहत अब तक देशभर में 525 से अधिक जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और बिना सिफारिश के योग्य नेतृत्व को आगे लाना था।
इस मॉडल के पीछे पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की प्रमुख भूमिका रही है। उनका उद्देश्य था कि जिला स्तर पर मजबूत नेतृत्व तैयार किया जाए और उन्हें टिकट वितरण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी जाएं।
लो-प्रोफाइल चेहरों को लेकर असंतोष
अभियान के तहत कई नए और लो-प्रोफाइल चेहरों को जिला अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन इनमें से कई नेता अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। कई जिलों में वरिष्ठ नेताओं और नए अध्यक्षों के बीच तालमेल की कमी देखने को मिल रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ जिला अध्यक्ष तकनीकी रूप से भी सक्षम नहीं हैं और पार्टी के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी तक अपडेट नहीं कर पाए हैं। वहीं कई स्थानों पर अब तक जिला स्तर की टीम का गठन भी नहीं हो सका है।
संगठन में समन्वय की चुनौती
इस मॉडल में दूसरे राज्यों के पर्यवेक्षकों द्वारा पैनल तैयार कर चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, पारंपरिक राजनीतिक संरचना में यह कॉरपोरेट शैली का प्रयोग पूरी तरह सफल होता नहीं दिख रहा है।
कई वरिष्ठ नेताओं को यह प्रक्रिया सहज नहीं लग रही, जिसके चलते नए नियुक्त अध्यक्षों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इससे संगठनात्मक समन्वय प्रभावित हो रहा है।
नेतृत्व का रुख स्पष्ट
पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के बावजूद शीर्ष नेतृत्व इस मॉडल को जारी रखने के पक्ष में है। राहुल गांधी तक इस संबंध में कई शिकायतें पहुंची हैं, लेकिन वे संगठन सृजन अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध बताए जा रहे हैं।
कांग्रेस अब इस मॉडल में सुधार करते हुए आगामी राज्यों में भी इसे लागू करने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि संगठन को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाया जा सके।