बुवाई की हुई शुरुआत, मानसून की पहली बारिश से किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
हंसराज खारोल,कुशायता। क्षेत्र में सोमवार को हुई मानसूनी बारिश के बाद किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। कुशायता, बिसुन्दनी, सुरजपुरा, कीडवा का झोपड़ा, बनेडिया, मेहरूकला, किशनपुरा, सदारा, आमली, आमली खेड़ा, सोकिया का खेड़ा, गोरधा, चिकलिया, पिपलाज सहित आसपास के गांवों में खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य तेज़ी से शुरू हो गया है।
ग्राम पंचायत कुशायता मुख्यालय की प्रशासक रसाल देवी खारोल, दशरथ खारोल, सुरजकरण बैरवा, भागचन्द मीणा, शिवराज खारोल तथा सोजीनाथ योगी ने बताया कि समय पर मानसून आने से किसानों ने खेतों का रुख कर लिया है। बारिश के बाद कृषि केंद्रों, खाद-बीज की दुकानों और मंडियों में किसानों की भीड़ बढ़ गई है। किसान घीसालाल बैरवा, सतू खारोल और शंकरलाल खारोल सहित अनेक किसान बुवाई में जुट गए हैं।
ग्राम पंचायत गोरधा मुख्यालय की प्रशासक पपिता देवी मीणा, भवानीराम मीणा, ओमप्रकाश मीणा, गोपाल मीणा, रवि वैष्णव, हेमराज सिंह दरोगा, रमेश सैन, गंगाराम मीणा और शिवराज मीणा ने बताया कि अगेती बुवाई से बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। किसानों ने समय रहते खेतों की तैयारी पूरी कर अब बुवाई शुरू कर दी है।
कृषि विभाग द्वारा इस बार किसानों को निःशुल्क एवं अनुदानयुक्त मिनी किट बीज उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनकी लागत में कमी आएगी। कृषि पर्यवेक्षक रामदयाल मीणा एवं कृषि पर्यवेक्षक सुशीला देवी कीर ने बताया कि पहली मानसूनी वर्षा के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है।
सहायक कृषि अधिकारी रामदयाल कुमावत ने बताया कि कुशायता, गोरधा, पिपलाज, मेहरूकला, सदारा, आमली, आमली खेड़ा सहित अन्य गांवों के करीब 50 हजार किसान खरीफ सीजन की बुवाई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए समय पर बुवाई करने की सलाह दी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पहली बारिश के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी आने से बीजों का अंकुरण बेहतर होता है तथा वातावरण में प्रदूषण कम होने से फसलों की स्वस्थ बढ़वार की संभावना भी बढ़ जाती है। किसानों को उम्मीद है कि इस वर्ष समय पर मानसून और अनुकूल मौसम से अच्छी पैदावार होगी