भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी सचिव की नियुक्ति पर उठे सवाल, विवादों में घिरा तबादला
भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी सचिव की नियुक्ति पर उठे सवाल, विवादों में घिरा तबादला
भीलवाड़ा। कृषि उपज मंडी समिति भीलवाड़ा में सचिव पद पर रजनीश सिंह की नियुक्ति के बाद एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली और सरकार की स्थानांतरण नीति चर्चा का विषय बन गई है। रजनीश सिंह का नाम पूर्व में भी विभिन्न विवादों और अनियमितताओं के आरोपों के कारण सुर्खियों में रहा है। ऐसे में उनकी भीलवाड़ा जैसी महत्वपूर्ण कृषि उपज मंडी में नियुक्ति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में रजनीश सिंह पर कई वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों के आरोप लगे थे। बताया जा रहा है कि इन मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा कुछ जांचें अब भी लंबित हैं। इसके अलावा जैसलमेर, राजसमंद, जोधपुर तथा आबूरोड से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया जा रहा है। आबूरोड से संबंधित एक प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग में एफआईआर संख्या 56/2025 दर्ज होने का दावा भी किया जा रहा है।
रजनीश सिंह की नियुक्ति के विरोध में भीलवाड़ा जिले के कई जनप्रतिनिधियों द्वारा राज्य सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराए जाने की भी चर्चा है। उनका कहना है कि जब विभाग में कई योग्य और बेदाग अधिकारी उपलब्ध हैं, तब विवादों से जुड़े अधिकारी को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण कृषि मंडियों में से एक का दायित्व सौंपना सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़े करता है।
जानकारों का कहना है कि रजनीश सिंह जहां-जहां पदस्थ रहे, वहां विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं और विवादों के आरोप सामने आते रहे। ऐसे में भीलवाड़ा मंडी में उनकी नियुक्ति से किसानों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी असंतोष की स्थिति बताई जा रही है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या कृषि विपणन विभाग इन आरोपों और लंबित जांचों के बावजूद इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करेगा, या फिर सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति केवल दावों तक ही सीमित रहेगी?
हालांकि, इस संबंध में रजनीश सिंह अथवा कृषि विपणन विभाग का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।