पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य चुनाव आयुक्त तलब
जोधपुर। प्रदेश में पंचायत एवं निकाय चुनाव समय पर नहीं कराए जाने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। एक्टिंग मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया राज्य चुनाव आयुक्त ने न्यायालय के आदेशों की पालना नहीं की है।
खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयुक्त तथा राजनीतिक आरक्षण से जुड़े ओबीसी आयोग के सचिव-परामर्शदाता को गुरुवार को व्यक्तिगत अथवा वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश गिरिराज सिंह देवंदा एवं संयम लोढ़ा की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत पंचायत एवं निकाय चुनाव कराना राज्य चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और आयोग को न्यायालय के निर्देशों का पालन करना चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग ने न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने दलील दी कि ओबीसी वर्ग को राजनीतिक आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आयोग ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 14 अगस्त तक का समय मांगा है और सरकार को अंतिम अवसर दिया जाए।
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संकेत दिए कि यदि राज्य चुनाव आयोग समय पर चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो न्यायालय वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार कर सकता है। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट कर चुका है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना भी चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके बावजूद रिपोर्ट का हवाला देकर चुनाव टालना न्यायालय के आदेशों की अवमानना है।