निकाय और पंचायत चुनाव: फर्जी मतदान पर अब बीएनएस के तहत होगी कार्रवाई, दोषी को एक साल तक की सजा
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों में फर्जी मतदान पर रोक लगाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। पहली बार स्थानीय निकाय चुनावों में चुनावी अपराधों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के बजाय भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधान लागू किए जाएंगे।
आयोग के निर्देशानुसार, यदि कोई व्यक्ति फर्जी मतदान करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ अब बीएनएस की धारा 172 और 174 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इससे पहले ऐसे मामलों में पुलिस आईपीसी की धारा 171-डी और 171-एफ के तहत कार्रवाई करती थी। नए कानून के तहत इस अपराध में एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
वोटर आईडी नहीं होने पर भी 11 दस्तावेजों से कर सकेंगे मतदान
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मतदाता के पास मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) उपलब्ध नहीं है, तो वह आयोग द्वारा निर्धारित 11 वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर मतदान कर सकेगा। इनमें प्रमुख रूप से आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, पेंशन दस्तावेज, बैंक अथवा डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक सहित अन्य स्वीकृत दस्तावेज शामिल हैं।
मतदाता सूची में अब भी जुड़वा सकते हैं नाम
राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों के लिए 1 जनवरी 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए मतदाता सूचियों के अद्यतन की प्रक्रिया जारी रखी है। आयोग के अनुसार, लोक सूचना जारी होने की तिथि तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है।
जिन व्यक्तियों की 1 जनवरी 2026 को आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है और उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से अपना नाम जुड़वा सकते हैं। वहीं, मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाने के लिए भी संबंधित कार्यालय में आवेदन किया जा सकेगा।
राज्य के सर्वाधिक और सबसे कम मतदाता वाले जिले
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सबसे अधिक मतदाता वाले पांच जिले हैं—
- जयपुर
- अलवर
- जोधपुर
- नागौर
- उदयपुर
वहीं सबसे कम मतदाता वाले पांच जिले हैं—
- जैसलमेर
- प्रतापगढ़
- सिरोही
- बूंदी
- राजसमंद
निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का समय पर अद्यतन और नए कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाना है।