पंचायतों की परंपरा ही आज का ‘मीडिएशन’, सभी विवादों का मूल समाधान संवाद : सीजेआई सूर्यकांत
जयपुर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय समाज में पहले पंचायतों के माध्यम से बैठकर विवादों का समाधान किया जाता था। आज उसी व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप में ‘मीडिएशन’ (मध्यस्थता) कहा जाता है। मीडिएशन का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विवाद के दौरान किसी एक पक्ष की आवाज दूसरे पक्ष पर हावी न हो और दोनों पक्षों को समान रूप से अपनी बात रखने का अवसर मिले।
जयपुर में आयोजित ‘कॉमनवेल्थ पीस, मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ’ विषयक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि विवाद छोटा हो या बड़ा, यहां तक कि दो देशों के बीच युद्धविराम का मामला ही क्यों न हो, सभी विवादों के समाधान का मूल सिद्धांत लगभग एक जैसा होता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान करने के लिए बोलने से अधिक सुनना जरूरी होता है। दोनों पक्षों की बात को सही ढंग से समझकर एक-दूसरे तक पहुंचाना और यह विश्वास कायम करना आवश्यक है कि वे आपसी समझ से बेहतर समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य कौशल नहीं, बल्कि कानूनी पेशे की सबसे कठिन योग्यताओं में से एक है, जिसे प्रशिक्षण और अनुभव के माध्यम से लगातार विकसित करना पड़ता है।
‘अदालतों के बजाय मध्यस्थता से स्थायी समाधान’
सम्मेलन में मौजूद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को शांति और मध्यस्थता की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अदालतों में वर्षों तक लंबित रहने वाले मुकदमों से व्यक्ति का समय, धन और संपत्ति तीनों प्रभावित होते हैं, जबकि मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का स्थायी और दीर्घकालिक समाधान संभव होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का कार्य वर्षों से पंचायतें करती रही हैं। पंचायतें केवल विवादों का निपटारा ही नहीं करती थीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न कटुता और मनमुटाव को भी समाप्त करने का प्रयास करती थीं। उन्होंने कहा कि यही परंपरा आज आधुनिक मध्यस्थता व्यवस्था के रूप में समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।