मुफ्त राशन योजना में 1.17 करोड़ अपात्र लोग कर रहे लाभ, केंद्र ने राज्यों को सूची सत्यापित कर हटाने के दिए निर्देश
नई दिल्ली/जयपुर।
केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। जांच में पता चला है कि करीब 1.17 करोड़ अपात्र लोग – जिनमें आयकरदाता, चारपहिया वाहन मालिक और कंपनी निदेशक भी शामिल हैं – इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि किस प्रकार कल्याणकारी योजनाओं में पात्र गरीब परिवार वंचित रह जाते हैं और अपात्र लोग सेंधमारी कर जाते हैं।
अन्य योजनाओं में भी अपात्र लाभार्थी
यह समस्या केवल राशन योजना तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), आयुष्मान भारत और अटल पेंशन योजना (APY) में भी अपात्र लाभार्थियों की मौजूदगी की शिकायतें सामने आती रही हैं। उदाहरण के तौर पर, पीएमएवाई में उच्च आय वर्ग के लोग भी सब्सिडी वाले आवास का लाभ उठा रहे हैं।
राज्यों को मिले निर्देश
केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि अपात्र लाभार्थियों की सूची का सत्यापन कर उन्हें हटाया जाए। उत्तर प्रदेश और बिहार ने डिजिटल सत्यापन और आधार-लिंक्ड डेटाबेस के जरिए यह प्रक्रिया शुरू भी कर दी है, लेकिन कई राज्यों में यह धीमी और अप्रभावी बनी हुई है।
अनुमान है कि कल्याणकारी योजनाओं की 15-20% धनराशि भ्रष्टाचार या गलत आवंटन में बर्बाद हो रही है।
विदेशों से सीख लेने की जरूरत
अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में खाद्यान्न और सामाजिक योजनाओं की सख्त निगरानी होती है। वहां डेटा एनालिटिक्स, क्रॉस-वेरिफिकेशन और बायोमेट्रिक पहचान के जरिए अपात्र लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर कर दिया जाता है।
समाधान की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा।
- आधार-लिंक्ड डिजिटल सत्यापन को मजबूत करना
- नियमित ऑडिट की व्यवस्था लागू करना
- तकनीक आधारित पारदर्शिता सुनिश्चित करना
- और जागरूकता पोर्टल बनाना जरूरी है, जिससे लोग अपात्र लाभार्थियों की सूचना सरकार तक पहुंचा सकें।