राजधानी जयपुर में पंचायत प्रधानों ने मिलकर जताई अपनी आवाज़: विकास और जनप्रतिनिधित्व बनाए रखने की मांग
दस दिसम्बर को समाप्त हो रहा है कार्यकाल, आज जयपुर में बैठक, तय करेंगे रणनीति
जयपुर | राजस्थान के अलग-अलग जिलों से आए पंचायत समिति प्रधान राजधानी में डेरा डाल चुके हैं—इस क़दम के पीछे एक ज़रूरी सवाल खड़ा है: क्या 10 दिसंबर को कार्यकाल पूरा होने के बाद, प्रधानों और जिला प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा? प्रशासक लगाने की मांग को लेकर प्रदेश भर की पंचायत समितियों के प्रधानों ने सोमवार को जयपुर में पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा, जनजातीय क्षेत्रीय विकास व गृह रक्षा मंत्री बाबूलाल खैराड़ी तथा मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, सीएम के विशिष्टसचिव अखिल अरोड़ा को ज्ञापन सौंपा।
सरपंचों की तरह, प्रधान चाहते हैं कि प्रशासनिक जिम्मेदारी उनको ही मिले ताकि सीमित समय में गांव, पंचायत और ज़िले के विकास कार्यों में बाधा न आए। प्रधान संघ के अध्यक्ष दिनेश सुंडा ने अपने साथियों के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय, पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर और अन्य अधिकारियों से मिलकर मांग रखी, “जब तक चुनाव नहीं हो जाते, तब तक जनप्रतिनिधि ही प्रशासक रहें।”
राजनीतिक गलियारों में प्रधानों की इस एकजुटता को ग्रामीण विकास और लोकतंत्र की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानों के मुताबिक, यदि कुर्सी खाली हुई तो गांवों के सैकड़ों काम ठप हो जाएंगे और आम जनता की आवाज़ शासन तक नहीं पहुंचेगी।
अरांई पंचायत समिति प्रधान सीता शैतान चौधरी के अनुसार ‘ प्रदेश की सवा तीन सौ पंचायत समितियों के प्रधानों का कार्यकाल 10 दिसंबर को पूरा हो रहा है। सभी प्रधान पिछले कई दिनों से विभिन्न स्तरों पर सरपंचों की तरह ही कार्यकाल समाप्त होने पर प्रधानों और जिला प्रमुखों को ही प्रशासक लगाने की मांग कर रहे है।’

बैठक के बाद प्रधानों ने अगली रणनीति पर चर्चा तेज़ की है—उनका कहना है, “सरकार को जल्दी सकारात्मक निर्णय लेना होगा, नहीं तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।”
इस आंदोलन में अजमेर, बूंदी, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, मकराना, भीलवाड़ा, राजसमंद समेत कई जिलों के प्रधान सामने आए। इसको लेकर जयपुर में सभी ने एकत्र होकर कई मंत्रियों को ज्ञापन दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायतीराज में तीन
स्तरीय व्यवस्था है। जिसमें सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख हैं। सरपंचों का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें
प्रशासक लगाया गया है। इसी तरह प्रधानों और जिला प्रमुखों को भी कार्यकाल पूरा होने पर प्रशासक लगाया जाए। ताकि ग्रामीण विकास लगातार चलता रहे। उन्होंने बताया कि सभी प्रधान मिलकर मंगलवार को जयपुर में ही बैठक करेंगे और उसमें चर्चा कर आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इस अवसर पर प्रदेश भर के दौ सौ से ज्यादा प्रधान उपस्थित थे।