सालों पुराने नोट्स नहीं चलेंगे अब कक्षाओं में: सुखाड़िया विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुधार तेज

सालों पुराने नोट्स नहीं चलेंगे अब कक्षाओं में: सुखाड़िया विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुधार तेज
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उदयपुर (प्रतीक पाराशर)। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में शिक्षा को कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़े बदलावों की शुरुआत हो गई है। कुलपति प्रो. बी.पी. सारस्वत ने स्पष्ट किया कि अब विश्वविद्यालय “पुराने नोट्स आधारित पढ़ाई” की परंपरा से आगे बढ़ रहा है, और नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कक्षाओं में आधुनिक, प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री-कनेक्टेड शिक्षण मॉडल लागू किए जा रहे हैं।

वाणिज्य संकाय और IQAC द्वारा आयोजित एकेडमिक रिव्यू मीटिंग को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि समय की माँग है कि विद्यार्थी सिर्फ सिद्धांत नहीं, बल्कि प्रयोगात्मक कौशल के साथ कॉलेज से बाहर निकलें। उन्होंने वाणिज्य संकाय द्वारा शुरू किए गए प्रैक्टिकल कोर्सेज को “उदयपुर मॉडल” बताते हुए घोषणा की कि इस मॉडल को वे कोटा विश्वविद्यालय में भी लागू करेंगे।

2016-17 से शुरू हुए प्रयास अब बन रहे बदलाव की धुरी

वाणिज्य संकाय अध्यक्ष एवं IQAC निदेशक प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने बताया कि प्रैक्टिकल कोर्सेज की नींव 2016–17 में ही रख दी गई थी। आज महाविद्यालय में टैली, एमएस एक्सेल, ईआरपी अकाउंटिंग, एसएपी, प्रैक्टिकल स्टॉक एक्सचेंज ट्रांजेक्शन, डिजिटल मार्केटिंग और बिज़नेस कम्युनिकेशन जैसे कोर्स विद्यार्थियों को सीधे उद्योगों से जोड़ रहे हैं और उन्हें बाज़ार की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं।

पैनल चर्चा में विशेषज्ञों की भागीदारी

बैठक के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट्स कमल खुर्दिया, अरुण पितलिया, हितेश कुदाल और विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुकेश बारबर ने पैनल डिस्कशन में हिस्सा लिया। शिक्षण पद्धति, परीक्षा प्रणाली और इंडस्ट्री एक्सपोज़र को और बेहतर बनाने पर सारगर्भित सुझाव प्रस्तुत किए गए।

डॉ. शिल्पा लोढ़ा ने कोर्सेज की वर्तमान स्थिति पर प्रभावी प्रेजेंटेशन दिया, जबकि विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्राध्यापकों ने अपने अनुभव और चुनौतियाँ साझा कीं।

कौशल आधारित शिक्षा मॉडल की ओर बड़ा कदम

चर्चाओं के संचालनकर्ता हेमंत कदूनिया ने पैनल के समक्ष विद्यार्थियों की ज़मीनी जरूरतों से जुड़े बिंदु रखे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. देवेंद्र श्रीमाली ने किया।

सुखाड़िया विश्वविद्यालय का यह प्रयास प्रदेश की पारंपरिक वाणिज्य शिक्षा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जा रहा है, जो आने वाले समय में विद्यार्थियों के रोजगार अवसरों को नई दिशा देगा।

admin - awaz rajasthan ki

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