मंगला पशु बीमा योजना से हज़ारों पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा
अजमेर | मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत जिले के 30606 पशुओं का बीमा होने से 16184 पशुपालकों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। इसमें से 9632 पशुपालकों के 192 14 पशुओं की बीमा पॉलिसी जारी हो चुकी है। योजना के तहत पशुपालकों के गाय, भैंस, बकरी, भेड़ व ऊंट का बीमा हुआ है। पशुपालकों को पशुधन की हानि होने पर आर्थिक रूप से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने बीते साल इस योजना को शुरू किया था। इसकी क्रियान्विति राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग कर रहा है। जबकि नोडल एजेन्सी पशुपालन
अधिकतम 40 हजार का मिलेगा क्लेम
डॉ. घीया के अनुसार बीमा एक वर्ष के लिए है। बीमा राशि का निर्धारण पशु की नस्ल, उम्र व दुग्ध उत्पादन क्षमता के आधार पर किया जा रहा है। लेकिन किसी भी स्थिति में बीमा की अधिकतम राशि 40 हजार रुपए से अधिक नहीं होगी। बीमा कराने वाले पशुओं की टैगिंग अनिवार्य है।
21 दिन में क्लेम
बीमित पशु की मृत्यु होने पर पशुपालक को इसकी सूचना तुरन्त बीमा विभाग को देनी होगी। बीमा प्रतिनिधि सर्वे तथा पशु चिकित्सक मृत पशु का पोस्टमार्टम परीक्षण कर सभी प्रक्रिया को निर्धारित ऐप में इन्द्राज करेगा। बीमा विभाज 21 दिन के अन्दर मृत बीमित पशु की क्लेम राशि का भुगतान संबंधित पशुपालक को करेगा। गौरतलब है कि तकनीकी कारणों के चलते साल 2018 से सरकारी पशु बीमा योजना बन्द थी। ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं की अकाल मौत पर आर्थिक हानि झेलनी पड़ रही थी।
विभाग है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घीया ने बताया कि इस साल जिले के 20530 जनाधार कार्डधारी पशुपालकों के 43932 पशुओं का बीमा किया जाना है। जिसमें से अब तक 16184 पशुपालक के 30606 पशुओं का बीमा किया जा चुका है। वर्तमान में पं. दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय शिविरों में पशु चिकित्सकों द्वारा शेष पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि योजना के तहत जनाधार कार्डधारक पशुपालकों के पशुओं का एक साल के लिए निःशुल्क बीमा होगा, यानि उन्हें प्रीमियम देने की आवश्यकता नहीं है।
मानसून के मद्देनजर टीकाकरण भी शुरू बारिश के मौसम में पशुओं को वर्षाजनित रोगों से बचाने के लिए विभाग ने टीकाकरण भी शुरू कर दिया है। डॉ. घीया ने बताया कि 3 लाख में से अब तक 90 हजार गायों में लंबी बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण हो चुका है। इसी तरह भैंसों में गलघोटू, गायों में लंगड़ा बुखार व भेड़-बकरियों में फड़किया रोग से बचाव के टीके लगाए जा रहे हैं।