मतदाता सूची में बदलाव: अब आधार, पैन कार्ड नहीं होंगे मान्य, पहचान के लिए देने होंगे 11 में से एक दस्तावेज
नागौर।
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण अभियान 2026 के अंतर्गत दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए हैं। इस बार आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड को केवल पहचान का दस्तावेज माना गया है, नागरिकता या निवास प्रमाण के रूप में नहीं।
नई व्यवस्था के अनुसार, अब मतदाता को 11 में से कोई एक दस्तावेज देना अनिवार्य होगा, जो उसकी नागरिकता, उम्र और निवास को प्रमाणित करे। दस्तावेज़ों में पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार पत्र, आदि शामिल हैं।
बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। चार श्रेणियों में मतदाताओं का वर्गीकरण किया गया है, जिनमें से प्रत्येक को अलग-अलग दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे।
मुख्य बातें:
- 2002 की वोटर लिस्ट में जिनका नाम है, उन्हें केवल गणना प्रपत्र भरना होगा।
- नए वोटर को माता-पिता के दस्तावेज़ या स्वयं के दस्तावेज़ देने होंगे।
- गलत जानकारी देने पर नाम हटाया जा सकता है या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यह अभियान मतदान व्यवस्था को पारदर्शी, वैज्ञानिक और कानूनी रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।