हर ग्राम पंचायत में महिलाओं को मिलेगा कृषि प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
जयपुर – प्रतीक पाराशर । राज्य के ग्रामीण परिदृश्य में महिला कृषकों की भूमिका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की पहल की है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, वर्ष 2025-26 में आयोजित 11,019 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 3.30 लाख से अधिक महिला कृषकों को लाभान्वित किया जा चुका है। आगामी चरण में इन प्रशिक्षणों का विस्तार करते हुए अधिक से अधिक महिलाओं को शामिल किया जाएगा। विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बीज उत्पादन तकनीक, मृदा एवं जल परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैविक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन, वर्षा जल संरक्षण और उन्नत सिंचाई तकनीकों जैसे ड्रिप एवं स्प्रिंकलर प्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही कीट एवं खरपतवार नियंत्रण, उन्नत बीज किस्मों का उपयोग और कृषि में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर रहेगा।
कार्यक्रमों का आयोजन उन ग्राम पंचायतों में किया जाएगा, जहां पिछले दो वर्षों में इस प्रकार का प्रशिक्षण नहीं हुआ है, ताकि अधिकाधिक क्षेत्रों में नई जानकारी का प्रसार हो सके। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की समझ का आकलन करने के लिए परीक्षण भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को कृषि उपयोगी सामग्री देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके अलावा, प्रतिभागियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे वे इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठा सकें।
इस पहल के तहत स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों, प्रगतिशील कृषकों और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें कृषि क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार करना है।
यह कार्यक्रम राज्य में सतत कृषि, जल संरक्षण और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।