महाशिवरात्रि विशेष: अजमेर के प्राचीन श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर की अद्भुत महिमा
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अजमेर जिले के भासा रोड स्थित हाथीखेड़ा गांव में विराजमान श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धा, आस्था और इतिहास का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है। यह मंदिर चौहान कालीन स्वयं प्रकट शिवलिंग के कारण विशेष महत्व रखता है। जनश्रुति के अनुसार महान शासक पृथ्वीराज चौहान स्वयं यहां पूजा-अर्चना के लिए आया करते थे, जिससे इस मंदिर की ऐतिहासिक गरिमा और भी बढ़ जाती है।
इस मंदिर की एक अनोखी विशेषता यह है कि यहां पिछले पांच वर्षों से वर्ष के सभी 365 दिनों में नियमित धार्मिक आयोजन होते आ रहे हैं। हर महीने की शिवरात्रि पर चार प्रहर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। प्रतिदिन भगवान कोटेश्वर महादेव का विभिन्न पदार्थों, फलों के रस और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है तथा हर दिन अलग-अलग रूपों में उनका श्रृंगार किया जाता है।
शुक्रवार को मंदिर में विशेष रूप से “राम नाम शिला” का श्रृंगार किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान राम ने लंका विजय से पूर्व शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की पूजा की, तब समुद्र में राम नाम लिखी शिलाएं तैरने लगीं और उनकी सेना ने समुद्र पार कर विजय प्राप्त की। शनिवार को मां पार्वती और भगवान शिव के चौरस खेल का प्रतीकात्मक श्रृंगार किया जाता है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।
मंदिर में नियमित रूप से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र अनुष्ठान, पार्थिव शिवलिंग पूजा, भजन-कीर्तन और शिव माला जैसे धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है और भोलेनाथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मंदिर के सुचारु संचालन और विकास के लिए कोटेश्वर महादेव ट्रस्ट की स्थापना की गई है, जो व्यवस्थाओं की देखरेख करता है।
प्रदोष व्रत की भी इस मंदिर में विशेष मान्यता है। मान्यता है कि प्रदोष काल भगवान शिव का अत्यंत पुण्य समय होता है, जब वे अपने गणों को पृथ्वी पर भेजकर भक्तों की स्थिति का अवलोकन कराते हैं। इसी काल में भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया था, इसलिए यह वेला अमृतदायिनी मानी जाती है। प्रदोष का अर्थ है सभी दोषों को दूर करने वाला समय। इस काल में की गई शिव पूजा जीवन के कष्टों को शांत करती है।
विभिन्न प्रकार के प्रदोष व्रतों का अलग-अलग महत्व बताया गया है—गुरु प्रदोष संतान सुख के लिए, शनि प्रदोष राजनीतिक लाभ के लिए, सूर्य प्रदोष उच्च पद की प्राप्ति के लिए और सोम प्रदोष जीवन में शांति के लिए किया जाता है।
महाशिवरात्रि पर इस प्राचीन मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर अभिषेक करते हैं। शांत, आध्यात्मिक वातावरण और प्राचीन परंपराएं इस स्थल को अजमेर के सबसे महत्वपूर्ण शिव धामों में स्थान दिलाती हैं। महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर आस्था और भक्ति का एक जीवंत केंद्र बन जाता है, जहां हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज उठता है।