फूलडोल महोत्सव श्रद्धा, तपस्या और गुरु-भक्ति का संगम- आचार्य रामदयाल

फूलडोल महोत्सव श्रद्धा, तपस्या और गुरु-भक्ति का संगम- आचार्य रामदयाल
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वाणीजी की शोभायात्रा के साथ शुरुहुआ फूलडोल महोत्सव।

शाही ठाठ बाट से निकली वाणी जी की शोभायात्रा। 

शाहपुरा 4 मार्च,2026। आस्था और धार्मिक उल्लास की अनुपम छटा के बीच मंगलवार प्रातःकाल अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के छः दिवसीय फूलडोल महोत्सव का शुभारंभ वाणीजी की भव्य एवं गरिमामयी शोभायात्रा के साथ हुआ। नगर के मध्य स्थित राममेडिया से गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों की ध्वनियों के बीच निकली यह शोभायात्रा श्रद्धा और भक्ति का सजीव स्वरूप बन गई।

बच्चों के हाथों में सजे-धजे थाल में चीनी(शक्कर) से बने मेल मालिया, हाथों में पताके लहराते हुए निकली शोभायात्रा के बीच में वाणीजी के दर्शन हेतु मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं मंगल गीत गाती हुई चल रही थीं, वहीं युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में वाणीजी का पाठ एक स्वर में गाते हुए नजर आए। शोभायात्रा जिन मार्गो से गुजरी तो संपूर्ण मार्ग राम नाम के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। शोभायात्रा रामनिवास धाम में सूरजपोल पहुंचने पर आचार्य ने ऊपर से पुष्प बरसाकर स्वागत किया।  

विभिन्न स्थानों पर आकर्षक विद्युत सजावट, रोशनी और रंग-बिरंगे हवाई झले, चकरिया सजावट मेले की छटा को और भी मनोहारी बना रही हैं। श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट ने निःशुल्क आवास व प्रसादी व्यवस्था की। रात्रि में धार्मिक पंडाल में संतों सहित आचार्य ने प्रवचन देते हुए कहा कि 

फूलडोल महोत्सव श्रद्धा, तपस्या और गुरु-भक्ति का संगम है। यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक परंपरा और लोकआस्था का विराट उत्सव है तथा 

प्रतियोगिता : इस महोत्सव के तहत मंगलवार को नगरपालिका द्वारा आयोजित अलगोचा प्रतियोगिता में डोहरिया ग्राम प्रथम, भैरू खेड़ा द्वितीय तथा शिवपुरा के ग्रामीण तृतीय स्थान पर रहे जिन्हें पारितोषिक दिए गए। 

सोमवार को होली सजाओ प्रतियोगिता में रामपुरा बस्ती, शांति नगर, तहनाल गेट क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे को पारितोषिक दिया। 

दो रंग होली(धुलंडी)पर्व के कारण दूसरे दिन मेले में रौनक कम दिखी।

शाहपुरा 4 मार्च। नगर में आयोजित फूलडोल महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को भी परंपरा अनुसार वाणीजी की भव्य शोभायात्रा शाही ठाठ-बाठ के साथ निकाली गई। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के साथ निकली शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मार्ग में श्रद्धालुओं ने वाणीजी के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

हालांकि धार्मिक उल्लास और पारंपरिक गरिमा के बावजूद इस बार मेले का दूसरा दिन भी अपेक्षाकृत फीका नजर आया। ग्रहण के प्रभाव तथा दो धुलंडी पर्व एक साथ होने के कारण राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों एवं विदेशों से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवक इस बार दूसरे दिन भी कम रही।

स्थानीय व्यापारियों और आयोजकों के अनुसार, श्रद्धालुओं की कम उपस्थिति का असर मेले की रौनक पर भी साफ दिखाई दिया। जहां पिछले वर्षों में दूसरे दिन से ही भीड़ उमड़ने लगती थी, वहीं इस बार मुख्य मार्गों और मेले परिसर में अपेक्षित चहल-पहल नहीं दिखी। दुकानदारों का कहना है कि भीड़ कम होने से व्यापार पर भी प्रभाव पड़ा है।

इसके बावजूद श्रद्धालुओं में आस्था और उत्साह बना रहा। शोभायात्रा के दौरान सैकड़ो श्रद्धालु वाणी जी के पाठ एवं राम नाम के स्मरण करते, धार्मिक नारों और पारंपरिक वेशभूषा में शामिल भक्तों ने माहौल को भक्तिमय बनाए रखा।

Dev Krishna Raj Parashar - Shahpura

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