तीन गुना शुल्क वृद्धि से भड़के व्यापारी, सुविधाओं पर उठे सवाल।

ऐतिहासिक मेले में व्यवस्थाओं को लेकर पालिका प्रशासन कठघरे में।निर्वाचित
बोर्ड खत्म, कांग्रेस का पालिका प्रशासन पर मनमानी का आरोप।
मेला स्थल परिवर्तन से बढ़ी परेशानी, व्यापार प्रभावित।विद्यालय
परिसर में मेला, प्रशासन के गले की फांस बन सकता।
शाहपुरा मार्च,2026। नगर में वार्षिक 6 दिवसीय ऐतिहासिक फूलडोल मेले में नगर पालिका की अनदेखी से मेले की व्यवस्था चरमराई गई। देशभर से मेले में अस्थाई दुकानें लगाने वाले व्यवसायियों और श्रद्धालुओं ने पालिका प्रशासन पर अनदेखी, मनमानी और सुविधाओं के अभाव के आरोप लगाए हैं।मेला ग्राउंड बदला, बढ़ी परेशानी: इस बार मेला स्थल में परिवर्तन करने से दुकानदारों और श्रद्धालुओं दोनों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। नए स्थान पर समुचित पार्किंग, पेयजल व शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से नाराजगी बढ़ी
निर्वाचित बोर्ड समाप्त, प्रशासन पर मनमर्जी का आरोप: नगर पालिका का निर्वाचित बोर्ड समाप्त होने के बाद से प्रशासनिक नियंत्रण अधिकारियों के हाथों में होने, जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण निर्णयों में पारदर्शिता की कमी से व्यवस्थाएं चरमरा गई। इस बार कम दुकानें तैयार करने से व्यापारी दो दिनों तक दुकानों के लिए भटकते रहे। मेले में जवाबदार मंच नहीं होने से दुकानदारों श्रद्धालुओं को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है
तीन गुना शुल्क वृद्धि से आक्रोश: मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों से पूर्व वर्षों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक शुल्क वसूलने से भारी रोष बढ़ गया। आवेदन फॉर्म के गत वर्ष 200रुपये से 1000 रुपए, दुकान भाड़ा 2000 से 5000रु, 100वाट तक विद्युत बल्ब के 200 से बढ़ाकर सीधे एक हजार रुपए वसूलने के साथ ही गन्ने की चरखी, फ्रिज लगाने पर 10हजार रुपए वसूले जा रहे है। वी है। डोलर, झूले के 9हजार बढाकर सीधे 25 हजार करने को लेकर व्यापारी रोष जताते हुए लूट करार दिया।
कहा कि हम देशभर के मेले करते है वहां के नगर निगम, निकाय भी इतना शुल्क नहीं वसूलते है।
सरकारी विद्यालय में मेला बन सकता प्रशासन के गले की फांस: बोर्ड परीक्षाओं के चलते राउमा विद्यालय परिसर में आयोजित मेला पालिका प्रशासन के गले की फांस बन सकता है। अभिभावकों और नागरिकों ने बोर्ड परीक्षाओं की अनदेखी, विद्यालय की संपत्ति को नुकसान और स्वच्छता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन के लिए यह निर्णय भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक विवाद का कारण बन सकता है। गौरतलब है कि इस सरकारी विद्यालय में पूर्व में भी मेला आयोजित करने पर कोर्ट में कार्रवाही हुई।
पुख्ता इंतजामों का अभाव: पेयजल व सुरक्षा इंतजामों की कमी उजागर होने है। मेला परिसर में प्रवेश का एक ही द्वार आसायमिक घटना होने पर सैकड़ों लोगों के लिए जीवन को खतरा बताया।प्रशासन पर उठते सवाल: ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़े इस मेले में व्यवस्थाओं की कमी ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किये। नागरिकों ने कहा कि व्यवस्थाएं शीघ्र नहीं सुधारीं तो मेले की छवि पर प्रतिकूल प्रभावपड़ सकती है। डोल चकरी वालो में रोष, प्रशासक से मांग: गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पालिका प्रशासन द्वारा दो गुना भाड़ा वसूलने को लेकर डोलर चकरी झूले के व्यवसायियों में गुस्सा फूट पड़ा।
गुरुवार को कांग्रेस के कार्यवाहक नगर अध्यक्ष रमेश सेन, सुनील मिश्रा की अगुवाई मेला प्रशासक एसडीएम से मिले और दुकानों का शुल्क कम करवाने की मांग की। कांग्रेस नेता सेन ने पालिका प्रशासन पर हट धर्मिता का आरोप लगाते हुए एसडीएम को बताया कि देश के कई राज्यों से महंगा भाड़ा लगाकर आने वालों को सताया जा रहा है। मनमाना भाड़ा वसूला जा रहा है
इनका कहना है: आरोप मिथ्या है, पालिका बोर्ड नहीं होने से प्रशासन की कोई मनमर्जी नहीं हो रही है, दुकानों का भाड़ा तय करना, स्थान चयन कमेटी का निर्णय है। बोर्ड परीक्षा के चलते मेला परिसर का चयन उच्च अधिकारियों द्वारा विद्यालय परिसर का अधिग्रहण के आदेश से हुआ। मेले में अभी व्यवस्थाएं माकूल है। रिंकल गुप्ता, आयुक्त, नगरपालिका, शाहपुरा