पंचायत चुनावों को लेकर आयोग की तैयारी पूरी, सुप्रीम कोर्ट से

पंचायत चुनावों को लेकर आयोग की तैयारी पूरी, सुप्रीम कोर्ट से
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राहत मिली तो बदल जाएगी जाएगी स्थानीय चुनावों की तस्वीर
जयपुर । पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की समय सीमा में ढील को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एक तरफ तो राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय चुनावों को कराने को लेकर तैयारी किए बैठा है, दूसरी तरफ कानूनी जंग में यदि राज्य सरकार को सुप्रीम
कोर्ट से राहत मिलती है, तो स्थानीय चुनावों की तस्वीर बदल जाएगी। साथ ही, प्रदेश की जमीनी राजनीति
की दिशा और गति दोनों प्रभावित हो सकती हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार को समय सीमा में राहत मिलती है या हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को यथावत रखा जाता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने ये दिया था आदेश
हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 के फैसले में राजस्थान सरकार को यह निर्देश दिया था कि
पंचायत और नगर निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक पूरा कराए जाएं और परिसीमन (वार्ड/ सीमाओं) का निर्धारण 31 दिसंबर 2025 तक खत्म किया जाए। अब यदि सुप्रीम कोर्ट उस समय सीमा में ढील देता है, तो सबसे पहला असर चुनाव कार्यक्रम पर पड़ेगा। अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने की बाध्यता हटने पर चुनाव आगे खिसक सकते हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह निर्णय दलों को अतिरिक्त तैयारी का अवसर देगा। सत्ताधारी
दल संगठनात्मक मजबूती, सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार चयन पर अधिक समय दे सकेगा। विपक्ष इसे चुनाव टालने के मुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जा सकता है। इससे राजनीतिक बयानबाजी और आरोप प्रत्यारोप तेज होना तय है। परिसीमन में नए वार्ड गठन या आरक्षण बदलाव से संभावित प्रत्याशियों की स्थिति प्रभावित होगी । जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में स्थानीय जवाबदेही का मुद्दा भी उठ सकता है।
सरकार ने कोर्ट से ये मांगी राहत
राज्य सरकार ने 4 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश में संशोधन की मांग करते हुए चुनाव कराने की निर्धारित समय सीमा में राहत चाही है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार चुनाव अप्रैल 2026 तक कराने की रूपरेखा तय की गई थी। राज्य सरकार का तर्क है कि वार्ड परिसीमन, आरक्षण निर्धारण और प्रशासनिक तैयारियों में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। नगरीय
निकायों और पंचायत क्षेत्रों में जनसंख्या आंकड़ों, भौगोलिक सीमाओं और सामाजिक आरक्षण के समायोजन की प्रक्रिया जटिल के कारण निर्धारित समय सीमा में चुनाव कराना व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है। सरकार ने यह भी निवेदन किया है कि जहां वर्तमान में निर्वाचित बोर्ड नहीं हैं, वहां प्रशासकों की नियुक्ति को चुनाव तक जारी रखने की अनुमति दी जाए।

admin - awaz rajasthan ki

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