अमूल की तानाशाही के खिलाफ अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी की हुंकार – “बड़ी मछली छोटी मछलियों को डकारना चाहती है, जरूरत पड़ी तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर देंगे धरना”*
* अमूल की तानाशाही के खिलाफ अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी की हुंकार – “बड़ी मछली छोटी मछलियों को डकारना चाहती है, जरूरत पड़ी तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर देंगे धरना”*
अजमेर। अजमेर डेयरी के 161वें संचालक मंडल (बोर्ड) की अहम बैठक में कई दूरगामी और कड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में एक तरफ जहाँ मल्टी स्टेट को- ऑपरेटिव (SPCDF – अमूल) की घुसपैठ को लेकर आर-पार की लड़ाई का शंखनाद किया गया है, वहीं दूसरी ओर दुग्ध उत्पादकों के हित में कई बड़ी कल्याणकारी योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही, संघ ने अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति का प्रदर्शन करते हुए 15 करोड़ रुपये के भारी लाभांश की घोषणा की है। अमूल के खिलाफ कड़ा आक्रोश और दिल्ली में आंदोलन की चेतावनी :- अमूल द्वारा मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव के रूप में राजस्थान में प्रवेश के प्रयास पर अजमेर डेयरी के अध्यक्ष श्री रामचन्द्र चौधरी ने तीखा प्रहार किया है। अमूल के इस कदम को राजस्थान के किसानों के खिलाफ एक ‘बड़ी साजिश’ बताते हुए उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि स्थानीय दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। दोगली नीति पर रोषः बैठक में इस बात पर गहरा रोष जताया गया कि अमूल 1960 से कार्य कर रहा है, लेकिन वह गुजरात में अपने किसानों को राजस्थान के मुकाबले कम कीमत दे रहा है। वहीं, राजस्थान में स्थापित मजबूत सहकारी ढांचे को कुचलने के लिए जानबूझकर ज्यादा कीमत का लालच दिया जा रहा है। कॉर्पोरेट साजिशः अध्यक्ष श्री चौधरी ने स्पष्ट किया कि अमूल सरदार डेयरी (SPCDF) फेडरेशन के नाम पर देश की अन्य सभी दुग्ध समितियों और संस्थाओं को हजम करना चाहती है। यह सीधे तौर पर “बड़ी मछली द्वारा छोटी मछलियों को डकारने” की सुनियोजित साजिश है। जबकि एनसीडीएफआई पहले से ही बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी: बोर्ड ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि राज्य सरकार और सहकारिता विभाग अमूल को यहाँ पैर पसारने की अनुमति देते हैं, तो अजमेर डेयरी इसके खिलाफ स्थगन आदेश (Stay) के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में वाद दायर करेगी।
जंतर-मंतर पर धरनाः अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि अगर जरूरत पड़ी तो राजस्थान के लाखों दुग्ध उत्पादकों और देश की ‘श्वेत क्रांति’ से जुड़े लोगों को साथ लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना दिया जाएगा और उग्र आंदोलन किया जाएगा। शानदार वित्तीय प्रदर्शन और राज्य सरकार से प्रमुख मांगें :- 15 करोड़ का मुनाफा:- संघ ने पशुपालकों को दूध का उच्चतम क्रय मूल्य देने के बावजूद, कुशल प्रबंधन के दम पर गत वित्तीय वर्ष में लगभग 15 करोड़ रुपये का भारी लाभांश (प्रॉफिट) अर्जित किया है। बकाया भुगतान की मांगः राज्य सरकार से पुरजोर अनुरोध किया गया है कि ‘मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना’ के बकाया 40 करोड़ रुपये और ‘मिड- डे मील योजना’ के 50 करोड़ रुपये का शीघ्र भुगतान किया जाए। इस राशि से मानसून के मौसम में पशुपालक समय पर अपनी फसल के लिए खाद, बीज और आवश्यक दवाइयां खरीद सकेंगे। नई भर्तियां: रिक्त पदों पर नई भर्ती के लिए RCDF के माध्यम से राज्य सरकार से पुनः अनुरोध किया गया है। पशुपालकों के लिए कल्याणकारी सौगातें :- बीमा योजनाः- अब पशुपालकों का बीमा LIC द्वारा करवाया जाएगा। इसके प्रीमियम की 1/3 (एक तिहाई) राशि अजमेर डेयरी स्वयं वहन करेगी, जबकि शेष 2/3 राशि समितियों के बचत खाते से चुकाई जाएगी। यदि RCDF द्वारा इसमें कोई अनुदान दिया जाता है, तो उतनी ही राशि समितियों के बचत खाते में से कम कर दी जाएगी। समितियों का 3 प्रतिशत कमीशन यथावत जारी रहेगा। बीज पर अनुदान (छूट): आगामी मौसम के लिए रोजड़ी फार्म से मिलने वाले 600 मीट्रिक टन रिजके के बीज पर संघ द्वारा किसानों को कीमत में विशेष अनुदान दिया जाएगा। सेक्स सॉर्टेड सीमनः यदि बस्सी फार्म से सेक्स सॉर्टेड सीमन निशुल्क उपलब्ध नहीं होता है, तो इसे पंतनगर विश्वविद्यालय (उत्तराखंड) से मंगवाकर वर्तमान अनुदान राशि पर ही पशुपालकों को उपलब्ध करवाया जाएगा। पशु आहारः- संघ ने आकलन किया है कि भविष्य में जिला संघ अजमेर को प्रतिदिन 4800 बैग पशु आहार की आवश्यकता होगी, जिसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासनिक, ढांचागत और कर्मचारी हित में बड़े निर्णय: कर्मचारियों की पदोन्नति का मुद्दाः संघ की संस्थापन समिति के प्रस्तावों में से मात्र दो कर्मचारियों का ही अनुमोदन किए जाने से शेष कार्मिकों में रोष है। अतः सदन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि शेष कर्मचारियों के पदोन्नति प्रस्तावों का अनुमोदन करने के लिए RCDF से पुनः अनुरोध किया जाए। जब तक वहां से स्वीकृति नहीं आती, तब तक संघ में प्रचलित स्थानीय प्रावधानों के अनुसार ही कार्यवाही की जाएगी।
हाईटेक पार्किंग व्यवस्थाः संघ परिसर में आने वाले अतिथियों, किसानों/ पशुपालकों एवं कर्मचारियों की सुविधा के लिए आधुनिक (Hi-tech / Modern) पैटर्न पर एक सुव्यवस्थित पार्किंग स्थल बनाने का निर्णय लिया गया है। पुराने प्लांट की नीलामी:- NDRI करनाल द्वारा पुराने प्लांट की मूल्यांकन रिपोर्ट बेहद कम दिए जाने के कारण, सदन ने उसे सिरे से खारिज कर दिया है। अब RTPP Act के नियमों के अनुसार नीलामी की न्यूनतम बेस राशि 15 करोड़ रुपये तय की गई है। स्वायत्तता की रक्षा:- RCDF द्वारा जारी उस परिपत्र को अमान्य कर दिया गया है जिसमें MD RCDF को अपील अधिकारी बनाया गया था। इस पर MD अजमेर डेयरी एवं RCDF प्रतिनिधि ने एतराज जताया। चूंकि डेयरी संघ एक स्वायत्त संस्था (Autonomous Body) है, इसलिए RCDF के SOP नियमों को पूर्णतः स्वीकार करने पर असहमति व्यक्त की गई। कृषि अनुसंधान के लिए जमीनः- तबीजी फार्म कैंपस की जमीन NRCSS को देने का निर्णय लिया गया है, ताकि भारत सरकार वहां उच्च कोटि के प्याज, लहसुन और अन्य उन्नत कृषि प्रोजेक्ट लगा सके, जो सीधे तौर पर किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा। नए आधुनिक पार्लर:- RCDF के दिशा-निर्देशों के अनुसार RTDC, सेशन कोर्ट, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, रेवेन्यू बोर्ड, नगर निगम के नवीन कार्यालय, MDS विश्वविद्यालय कैंपस और साइबर कलेक्ट्रेट में आधुनिक दुग्ध पार्लर खोलने को हरी झंडी दी गई है। BMC का आवंटनः भविष्य में BMC (बल्क मिल्क कूलर) का आवंटन केवल संघ द्वारा ही अपने स्तर पर किया जाएगा। जिस पर प्रबंध संचालक अजमेर डेयरी और आरसीडीएफ प्रतिनिधि ने विरोध दर्ज कराया। डेटा ट्रांसफर :- रील (REIL) कंपनी द्वारा दुग्ध समितियों का 1 अप्रैल 2026 के बाद प्रतिदिन का डेटा ‘टेक्स्ट एक्सपर्ट’ (Text Expert) जयपुर को भेजा जाएगा। NPDD कार्य:- अजमेर डेयरी की क्षमता और दूध की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष में NPDD से (B Part) की अनुमति मिलने पर सोलर सिस्टम, चिज प्लांट (Cheese Plant), चिपलेट मशीन, क्रीम प्लांट का कार्य पूर्व की भांति NPDD के माध्यम से ही संपन्न करवाया जाएगा।