राजस्थान में बदल सकता है चुनावी क्रम, पंचायत से पहले कराए जा सकते हैं निकाय चुनाव

राजस्थान में बदल सकता है चुनावी क्रम, पंचायत से पहले कराए जा सकते हैं निकाय चुनाव
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जयपुर। राजस्थान में इस बार स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों का पारंपरिक क्रम बदलने की संभावना जताई जा रही है। सरकारी स्तर पर ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि पहले नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के चुनाव कराए जाएं, जबकि इसके बाद पंचायतीराज संस्थाओं के लिए मतदान कराया जाए। यदि यह निर्णय लागू होता है तो प्रदेश में वर्षों से चली आ रही चुनावी परंपरा में बदलाव देखने को मिलेगा।

सूत्रों के अनुसार सरकार प्रशासनिक तैयारियों, परिसीमन की स्थिति और राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए इस विकल्प पर विचार कर रही है। अब तक सामान्यतः पंचायत चुनाव पहले और निकाय चुनाव बाद में आयोजित होते रहे हैं, लेकिन इस बार शहरी क्षेत्रों से चुनावी शुरुआत करने की रणनीति पर मंथन चल रहा है।

शहरी जीत को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी

राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन का सकारात्मक संदेश ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाया जा सकता है। निकाय चुनावों में सफलता मिलने पर इसका असर पंचायत चुनावों में भी देखने को मिल सकता है, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और संगठनात्मक माहौल मजबूत होगा।

एक करोड़ से अधिक शहरी मतदाता, चार करोड़ ग्रामीण वोटरों पर नजर

प्रदेश की मतदाता सूची के अनुसार नगरीय निकाय क्षेत्रों में करीब 1.10 करोड़ मतदाता हैं, जबकि पंचायतीराज संस्थाओं से जुड़े मतदाताओं की संख्या लगभग 4.02 करोड़ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि निकाय चुनावों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो उसका प्रभाव ग्रामीण मतदाताओं के बीच भी पड़ सकता है।

ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट को मिलेगी प्राथमिकता

राज्य सरकार को ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। माना जा रहा है कि आयोग पहले नगरीय निकायों के आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। जानकारी के अनुसार आयोग द्वारा ओबीसी परिवारों का सर्वे कराया जा रहा है, जिसके जुलाई के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद अगस्त के मध्य तक रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा सकती है।

अदालत में चुनाव कार्यक्रम को लेकर रखा जा सकता है पक्ष

सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट के समक्ष चुनाव कार्यक्रम को लेकर नया पक्ष रख सकते हैं। संभावना है कि अदालत से सितंबर से नवंबर के बीच चुनाव कराने की अनुमति का अनुरोध किया जाए। निर्वाचन आयोग का कहना है कि केवल निकाय चुनाव संपन्न कराने में ही लगभग 40 दिन का समय आवश्यक होगा।

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए फिलहाल चुनाव कार्यक्रम को लेकर कोई भी टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

प्रदेश में 385 नगरीय निकाय और 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें

राजस्थान में वर्तमान में 385 नगरीय निकाय हैं, जिनमें सात बड़े नगर निगम—जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर और भरतपुर शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश में 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें, 108 पंचायत समितियां और जिला परिषदें कार्यरत हैं। इनमें से कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर तक समाप्त होने वाला है। इसी को देखते हुए सरकार चुनावी कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए निकाय और पंचायत चुनावों का क्रम बदलने पर विचार कर रही है।

admin - awaz rajasthan ki

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