अनासागर झील डिसिल्टिंग मामला: बिना वेटलैंड निर्धारण के कार्य पर शासन सचिव समेत सभी पक्षों को नोटिस, कल होगी महत्वपूर्ण सुनवाई
अजमेर। ऐतिहासिक अनासागर झील में चल रहे डिसिल्टिंग (गाद निकालने) कार्य को लेकर दायर याचिका पर कल सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ वर्ग) नगर उत्तर की अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई न्यायाधीश आशिका जैन के समक्ष होगी। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका पूर्व विधायक एवं शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल तथा कांग्रेस उपाध्यक्ष फखरे मोइन द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनासागर झील में बिना वैज्ञानिक मानकों, बिना वेटलैंड (आर्द्रभूमि) की सीमाओं का निर्धारण किए तथा आवश्यक पर्यावरणीय प्रक्रियाओं का पालन किए बिना डिसिल्टिंग का कार्य कराया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह पहला अवसर नहीं है जब अनासागर झील में डिसिल्टिंग की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। पूर्व में भी बिना समुचित योजना, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और वेटलैंड नियमों की पालना किए झील से गाद निकालने के प्रयास हुए थे, जिससे झील के पारिस्थितिकी तंत्र और जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई थी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रशासन ने वेटलैंड क्षेत्र का विधिवत निर्धारण किए बिना झील के मूल स्वरूप में हस्तक्षेप किया है, जो पर्यावरणीय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के विपरीत है। इसी आधार पर न्यायालय ने शासन सचिव (स्वायत्त शासन विभाग), जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त तथा अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पूर्व लोक अभियोजक विवेक पाराशर, अधिवक्ता जितेश धनवानी, अधिवक्ता रोहन पराशर एवं अधिवक्ता तेजस्विनी पराशर पैरवी कर रहे हैं। अधिवक्ताओं का तर्क है कि बिना वेटलैंड निर्धारण के डिसिल्टिंग कराया जाना न केवल अनासागर झील के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि यह सर्वोच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है।
अब इस मामले में कल होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। न्यायालय के अगले आदेश से अनासागर झील में चल रहे डिसिल्टिंग कार्य की दिशा और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होने की संभावना है।
