जयपुर की विरासत पर संकट: हाईकोर्ट सख्त, परकोटे में अवैध निर्माण पर तत्काल रोक के निर्देश
जयपुर। गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र में तेजी से हो रहे अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि यदि शहर के मूल हैरिटेज स्वरूप और पारंपरिक स्थापत्य के साथ इसी तरह छेड़छाड़ जारी रही तो जयपुर की विश्व धरोहर पहचान पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
जितेंद्र शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह और न्यायाधीश संदीप तनेजा की खंडपीठ ने नगर निगम आयुक्त को परकोटा क्षेत्र में बिना सक्षम अनुमति किए जा रहे निर्माणों पर तत्काल रोक लगाने तथा शहर के मूल हैरिटेज स्वरूप को बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
पहले चार प्रमुख मार्गों पर कार्रवाई
अदालत ने प्रथम चरण में परकोटा क्षेत्र के चार प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इनमें किशनपोल बाजार, चौड़ा रास्ता, जौहरी बाजार तथा चांदपोल बाजार से छोटी चौपड़ होते हुए त्रिपोलिया गेट और बड़ी चौपड़ तक का मार्ग शामिल है।
कोर्ट ने इन क्षेत्रों में बिना स्वीकृति या निर्धारित नियमों के विपरीत किए गए निर्माणों की पहचान कर कार्रवाई करने और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया।
2027 में जयपुर के 300 वर्ष, विरासत बचाने की चुनौती
सुनवाई के दौरान अदालत ने जयपुर की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नवंबर 2027 में शहर की स्थापना के 300 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में शहर के मूल स्वरूप को संरक्षित करना बेहद महत्वपूर्ण है।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
हवेलियों की जगह बढ़ते व्यावसायिक परिसर
परकोटा क्षेत्र में पुराने आवासीय भवनों और हवेलियों के स्वरूप में बदलाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर पारंपरिक झरोखे, छज्जे और स्थापत्य शैली गायब होकर उनकी जगह आधुनिक कांच के फ्रंट, शटर और नई मंजिलें ले रहे हैं।
आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ने से बाजारों का स्वरूप भी बदल रहा है। इससे जयपुर की पारंपरिक वास्तुकला और बाजारों की एकरूपता प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है।
बिल्डिंग नियमों की अनदेखी के आरोप
परकोटा क्षेत्र में सामने आ रहे निर्माणों को लेकर बिल्डिंग बायलॉज के पालन पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतों में कई तरह की अनियमितताओं का उल्लेख किया जाता रहा है—
- स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण
- पार्किंग के लिए निर्धारित स्थान का अभाव
- नियमों के विपरीत बेसमेंट निर्माण
- आवासीय भवनों का व्यावसायिक इस्तेमाल
- भवनों के मूल फ्रंट और बाहरी स्वरूप में बदलाव
- स्वीकृत सीमा से अधिक मंजिलों का निर्माण
नोटिस के बाद भी निर्माण पूरा होने का आरोप
परकोटा क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम की कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कई मामलों में निर्माण शुरू होने के बाद नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई में देरी के कारण तब तक निर्माण पूरा हो जाता है।
कुछ मामलों में भवनों को सील किए जाने के बाद भी बाद में सील खुलने के आरोप सामने आते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण की शुरुआत में ही प्रभावी कार्रवाई हो तो अवैध निर्माण को पूरा होने से क्यों नहीं रोका जा रहा।
हैरिटेज संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल
जयपुर के परकोटा क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने के लिए हैरिटेज संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद पुराने भवनों में बदलाव और नए व्यावसायिक निर्माण लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब नगर निगम की कार्रवाई और उसके परिणाम पर नजर रहेगी। खास तौर पर चार प्रमुख बाजारों में होने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन शहर की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने के लिए कितनी प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई करता है।