ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हनुमान अंश’ को ऐतिहासिक लुक देकर छाए भीलवाड़ा के रवि के पाराशर
भीलवाड़ा। देशभर के सिनेमाघरों में इन दिनों फिल्म ‘हनुमान अंश’ दर्शकों के बीच चर्चा में है। दमदार पटकथा और मनोरंजक कहानी के साथ फिल्म के विजुअल्स और ऐतिहासिक परिवेश को जीवंत करने वाली सिनेमैटिक प्रस्तुति भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
फिल्म के इस शानदार विजुअल ट्रीटमेंट के पीछे भीलवाड़ा के वरिष्ठ डीआई कलरिस्ट रवि के पाराशर की तकनीकी दक्षता और कलात्मक दृष्टिकोण अहम भूमिका निभा रहा है। पाराशर ने फिल्म के रंग-संयोजन पर बारीकी से काम करते हुए पर्दे पर उस दौर के वातावरण और ऐतिहासिक माहौल को उभारने का प्रयास किया है।
पुराने दौर को जीवंत करने की चुनौती
रवि के पाराशर के अनुसार, ‘हनुमान अंश’ एक पीरियड ड्रामा होने के कारण सबसे बड़ी चुनौती ऐसी विजुअल भाषा तैयार करना थी, जो दर्शकों को कहानी के कालखंड में ले जा सके।
उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य सिर्फ दृश्यों को ‘पुराना’ दिखाना नहीं था, बल्कि कहानी के अनुरूप एक कालजयी सिनेमाई सौंदर्यशास्त्र तैयार करना था। इसके लिए फिल्म के कलर पैलेट, कंट्रास्ट, सैचुरेशन, स्किन टोन और शैडोज पर बेहद बारीकी से काम किया गया।
फिल्म के दृश्यों में मिट्टी के स्वाभाविक रंगों और प्राकृतिक टोन्स को उभारते हुए आधुनिक रंगों को नियंत्रित किया गया, ताकि ऐतिहासिक माहौल बरकरार रहे और बड़े पर्दे पर विजुअल्स प्रभावी दिखाई दें।
ऐतिहासिक माहौल और आधुनिक थिएटर क्वालिटी के बीच संतुलन
पाराशर ने बताया कि फिल्म में ऐतिहासिक वातावरण को बनाए रखने के साथ-साथ आधुनिक थिएटर की तकनीकी गुणवत्ता का भी ध्यान रखना जरूरी था। इसी संतुलन को हासिल करने के लिए रंगों और प्रकाश के स्तर पर व्यापक काम किया गया।
उन्होंने कहा कि दृश्यों को अंतिम रूप में नया जीवन लेते देखना उनके लिए सुखद अनुभव रहा। इस भव्य विजुअल क्राफ्ट को आकार देने का काम ‘गलेरी ग्रेस स्टूडियो’ में संपन्न हुआ।
बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म की मजबूत पकड़
करीब 2 करोड़ रुपए के सीमित बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ अब 100 करोड़ क्लब की दहलीज पर पहुंच चुकी है। उपलब्ध बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने 29 दिनों में भारत में करीब 82.88 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन और 84.75 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज किया है।
फिल्म की यह सफलता इसे 2026 की चर्चित लो-बजट फिल्मों में शामिल कर रही है। सीमित बजट के बावजूद फिल्म का मजबूत प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि प्रभावशाली कहानी और बेहतर तकनीकी प्रस्तुति मिलकर बड़े स्तर पर दर्शकों तक पहुंच बना सकती है।
भीलवाड़ा के हुनर को मिला राष्ट्रीय मंच
‘हनुमान अंश’ के विजुअल ट्रीटमेंट में रवि के पाराशर के योगदान ने भीलवाड़ा की तकनीकी और रचनात्मक प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर दिया है।
पाराशर के कलात्मक विजन और तकनीकी दक्षता ने यह दिखाया है कि सिनेमा में केवल बड़ा बजट ही सफलता का आधार नहीं होता। सशक्त कहानी, बेहतर विजुअल क्राफ्ट और तकनीकी गुणवत्ता का प्रभावी संयोजन सीमित संसाधनों में भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ सकता है।
फिल्म के विजुअल्स को आकार देने और भीलवाड़ा का नाम फिल्म इंडस्ट्री में आगे ले जाने का यह अनुभव रवि के पाराशर के लिए गौरव का क्षण है।