जयपुर: राजस्थान में रोटेशन को लेकर तीन पंचायतों में सरपंच की आरक्षण लॉटरी हाईकोर्ट से रद्द, सात दिन में फिर होगी कवायद
जयपुर: राजस्थान में रोटेशन को लेकर तीन पंचायतों में सरपंच की आरक्षण लॉटरी हाईकोर्ट से रद्द, सात दिन में फिर होगी कवायद
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की तीन पंचायतों के सरपंच चुनाव के लिए आरक्षण लॉटरी रद्द कर दी. अदालत ने आरक्षण रोटेशन नियम की पालना करते हुए नए सिरे से लॉटरी निकालने के आदेश दिए. जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश रविंन्द्र सिंह व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए. रद्द की ग्राम पंचायतों में भरतपुर के उच्चैन की बरीघा ग्राम पंचायत, करौली की श्रीमहावीरजी और अकबरपुर पंचायत शामिल हैं.
अदालत ने अपने आदेश में कहा, आदेश की सत्यापित प्रति मिलने के सात दिन के भीतर लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाए. याचिकाओं में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि आरक्षण रोटेशन के नियमों के तहत पंचायत बनने के बाद सरपंच पद के चुनाव के लिए सबसे पहले एससी वर्ग को वरीयता दी जाएगी. साल 1994 के राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियम लागू होने के बाद पहली बार साल 1995 में इन स्थानों पर एससी वर्ग के लिए सरपंच की सीट आरक्षित रखी गई. इसके बाद से अब तक यहां छह बार चुनाव हो चुके और दो बार एससी वर्ग के लिए सीट आरक्षित रखी गई.
याचिका में दिए तर्क:
याचिका में कहा गया कि आरक्षण सर्किल पूरा होने के लिए जरूरी है कि जिस जाति को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उन्हें लॉटरी में शामिल नहीं किया जाए. इसके बावजूद इस बार हो रहे सातवें चुनाव में एससी वर्ग को लॉटरी में शामिल किया गया और उनके लिए ही सीट आरक्षित कर दी गई. इसके चलते सात में से तीन बार एससी वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल गया. इससे आरक्षण रोटेशन नियमों की अवहेलना हुई है. लिहाजा इन सीटों पर दिया एससी आरक्षण रद्द किया जाए. इस पर एकलपीठ ने तीनों पंचायतों के सरपंच पद के लिए निकाली लॉटरी रद्द करते हुए आरक्षण रोटेशन से नए सिरे से लॉटरी निकालने के आदेश दिए.