अरनिया घोड़ा के वन श्रेत्र में फैली विकराल आग।

अरनिया घोड़ा के वन श्रेत्र में फैली विकराल आग।
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“धरती से अंबर तक 5 घंटे चली धुंए की आंधी”
6 किलोमीटर श्रेत्र में फैला 1000 बीघा वन क्षेत्र में लगी आग।
कई हरे वृक्ष, पौधे चढ़ें आग की भेंट।
सैकड़ों जीव-जंतुओं, जानवरों का उजड़ा आशियाना।
आग से घिरे वनपाल ने बचाई सहकर्मी की जान।
हजारी कुआं गांव खाली करवाया, बीड से सटे गांव में फैली दहशत।
6दमकलों, वनकर्मियों, ग्रामीणों की मदद से आग को बढ़ने से रोका।

शाहपुरा, 21 अप्रैल। शाहपुरा तहसील के अरनिया घोड़ा ग्राम के पास 6 किलोमीटर के दायरे में फैला 1000बीघा का वन क्षेत्र में रविवार को दोपहर अज्ञात कारणों के चलते हुए भीषण अग्निकांड ने हड़कंप मचा दिया। 1 बजे से 5 बजे तक चली तेज हवाओ ने बीड से लगते कुछ गांव में ढहशत फैलादी। वन्यजीवों की सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा कर दिया। आग इतनी विकराल थी कि जमीन से आसमान तक धुएं की मोटी परत छा गई जो कई किलोमीटर दूर से दिखाई दी।
तेज चली हवाओं के कारण आग से जली सुखी घास, पेड़-पत्तों ने पलक झपकते ही हवा के बहते रुख से एक हजार बीघा में से 400 बीघा वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।
हरे – भरे पेड़-पौधों की संपदा स्वाहा: 6 किलोमीटर में फैले बीड में कई हरे-भरे वृक्ष, फैली हरियाली, वनस्पतियाँ, घनी झाड़ियां तथा गत वर्ष हरित राजस्थान के तहत लगाए गए सैकड़ों पौधे विकराल आग की चपेट में आकर जलकर खाक हो गए।

पक्षियों के घोंसले जलकर हुए राख, उजड़ा आशियाना: उपआग के कारण सैकड़ों पक्षियों के घोंसले और अंडे नष्ट हो गए। रेंगने वाले जीव के साथ भीषण आग से सैकड़ों जीव, जानवर इधर-उधर भागते नजर आए। कई जानवरों के झुलसने की आशंका जताई जा रही है। जीवों के बिल भी आग से अनछुए नहीं रहे।

वनपाल ने बचाई सहकर्मी की जान: वन क्षेत्र में उठे धुएं को देख वनपाल विश्राम मीणा तथा तकनीशियन सीताराम माली आग को बुझाने के लिए वन क्षेत्र में दौड़ पड़े। आग बुझाने के प्रयास में दोनों कर्मी चारों ओर आग से गिर गए। जान बचाने के प्रयास में माली जलती झाड़ियों की खाई में जा गिरे। मीणा ने तत्काल खींच कर माली की जान बचाई। इस दौरान माली के शर्ट जल गया व हल्का जुलस गये। माली की जान बचने से बड़ा हादसा टल गया।

वन की आग गांव तक फैली, गांव करवाया खाली: तहसीलदार उत्तम जांगिड़ ने बताया कि तेज हवाओं के कारण आग बीड की बाड़ को लांगकर बीड से सटे गांव हजारी कुआं गांव की ओर बढ़ने लगी। इस दौरान दौरान गांव को खाली करवाया गया। वही सटे
सरदारपुरा, माताजी का खेड़ा, अरनिया घोड़ा, सुदर्शनपुरा के ग्रामीणों में भी दहशत से अफरा-तफरी मच गई। कई परिवार गांव खाली करने की तैयारी में लग गए।
6 दमकलों, वन कर्मियों व ग्रामीणों की सूझबूझ से आग को बढ़ने से रोका: अजमेर जिले के केकड़ी, सरवाड़ से, भीलवाड़ा से 2, अंगुचा, गुलाबपुरा तथा जहाजपुर से आई 6दमकलों, शाहपुरा, जहाजपुर के वन कर्मियों की टीमों तथा अरनिया घोड़ा के पूर्व सरपंच राजेंद्र चौधरी, आसपास गांव के मुकेश जाट, दुर्गेश जाट, संजय गोस्वामी, बनवारी गुर्जर, धर्मराज गुर्जर, मदन गोपाल जाट, लालाराम जाट शिवराज सिंह अंकित जाट आदि सैकड़ों ग्रामीणों की मदद से बीड से सटी सीमाओं पर पानी छिटक कर आग को बढ़ने से रोका।
ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त: समय पर दमकल मौके पर नहीं पहुंचने से आगजनी को लेकर ग्रामीणों में रोष था। लोगों का आरोप था कि समय रहते शाहपुरा नगर परिषद की दमकल आ जाती तो हादसा तल सकता था। परिषद की दमकल खराब रहने से क्षेत्र में होने वाले ऐसी आगजनी की घटना से दूरदराज से दमकल आने तक आगजनी के बड़े हादसे क्षेत्र में बढ़ रहे है।
पराली जलाने या बाड़ जलाने की आशंका: आशंका व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि वनक्षेत्र के पास खाली खेत में पराली जलाने या बाड़ को जलाने के कारण या प्रचंड गर्मी के चलते आगजनी होने से यह बड़ा अग्निकांड हुआ होगा।
जिला कलक्टर मौके पर पहुंचे: इस बड़े अग्नि कांड के चलते कलक्टर जसमीत सिंह संधू मौके पर पहुंचे, स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को जांच के आदेश दिए। इस मौके पर कार्यवाहक एसडीएम बाबूलाल, आईएस प्रशिक्षु विश्वजीत सिंह, वनविभाग के जिलाधिकारी गौरव गर्ग, तसीलदार उत्तम जांगिड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश आर्य, उपाधीक्षक ओम प्रकाश विश्नोई, थानाधिकारी सुरेश चन्द मौके पर पहुंचे।
इनका कहना है: 220 हेक्टेयर वन क्षेत्र के 100 हैक्टर भाग ही आग की चपेट में आने से अफरा तफरी मच गई। आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल सका है। कलक्टर ने वन व पुलिस व प्रशासन को जांच करने के निर्देश दिए है। वन विभाग और प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है और आग की संभावना वाले कारणों की तलाश जारी है। उत्तम जांगिड़, तहसीलदार, शाहपुरा

Dev Krishna Raj Parashar - Shahpura

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