शाहपुरा में तूफान के बाद सूरज की पहली किरण के साथ शुरू हुआ राहत कार्य।

शाहपुरा में तूफान के बाद सूरज की पहली किरण के साथ शुरू हुआ राहत कार्य।
Spread the love

शाहपुरा में तूफान के बाद सूरज की पहली किरण के साथ शुरू हुआ राहत कार्य।
आंखों में कटी रात।
विद्युत आपूर्ति बहाली में देरी से जनता परेशान। नुकसान का आंकलन करना मुश्किल।
सौर ऊर्जा स्ट्रक्चर ताश के पत्तो की तरह उड़े।
दीवार गिरने से पशुपालक घायल, पशुओं की बचाई जान।
शाहपुरा, 23 मई:
गुरुवार सायं आए भीषण तूफान ने शाहपुरा में भारी तबाही मचाई। जिसके बाद दूसरे दिन भी शहर के कई हिस्सों में विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। रातभर अंधेरे में डूबे रहने के बाद शुक्रवार को तेज गर्मी के बीच बिजली की अनुपस्थिति ने लोगों को परेशान किया। कई क्षेत्रों में लोगों ने रात आंखों में जागकर गुजारी और दिन में गर्मी से जूझते दिखे।

नगर परिषद का राहत कार्य: नगर परिषद सभापति रघुनंदन सोनी ने कहा कि कल रात अंधेरा होने और संसाधनों की कमी के कारण गुरुवार रात रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा था। शुक्रवार को सूरज की पहली किरण के साथ ही नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की गठित की गई टीमें सक्रिय हुईं और भीलवाड़ा मार्ग सहित विभिन्न स्थानों पर टूटे भारी-भरकम पेड़ों को मशीनों की मदद से काटकर हटाने का काम शुरू किया। चोक हुए नालों को खोलने का कार्य भी तेजी से किया गया, ताकि जलभराव की समस्या से निजात मिल सके।

टूटे विद्युतपोल टावर खड़े किए:- अजमेर विद्युत वितरण निगम की टीमें भी शुक्रवार को राहत कार्य में जुटी दिखी। तूफान के कारण आसींद मार्ग पर 33केवी के झुके दोनों टावरों को पुनः खड़ा किया गया। नगर में टूटे 13 पोल, मंडलिया फीडर के 2, माताजी खेड़ा गांव के 3, अरनिया घोड़ा 6, सूरजपुरा में 7, रहड़ में चंबल लाइन के लिए लगाए गए 10 पोल टूटे विद्युत पोलो के स्थान पर नए पोल खड़े कर बिजली तारों और केबलों को बदलने का काम शुरू किया गया। हालांकि, कई क्षेत्रों में तारों और केबलों पर गिरे पेड़ों के कारण विद्युत आपूर्ति बहाली में देरी हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी आपूर्ति बहाल करने में अभी और समय लग सकता है।

प्रशासन जनप्रतिनिधियों पर गुस्सा बरकरार:- दूसरे दिन भी टीम में भी कई क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं होने से स्थानीय लोगों में प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता को लेकर रोष बना हुआ है, हालांकि राहत कार्य शुरू होने से कुछ हद तक स्थिति संभल रही है।

सामान को सुरक्षित व संरक्षित करने में जुट दुकानदार:- राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित मेगा ट्रेड फेयर में तबाही के बाद रात में विद्युत आपूर्ति ठप होने और मेला परिसर के पानी से कीचड़ होने के कारण दुकानदारों और उनके कर्मचारियों को बिना खाना पकाए और खाए रात गुजारनी पड़ी। बच्चों और महिलाओं को स्कूल के बरामदों में शरण लेनी पड़ी, जहां अंधेरे में रात काटना उनके लिए मुश्किल भरा रहा। शुक्रवार को दिन में दुकानदार अस्त व्यस्त टूटे फटे टेंटो के नीचे खराब, टूटे फूटे सामनों सुरक्षित व संरक्षित करने में जुट दिखे। पानी से खराब कपड़ों को सूरज की रोशनी दिखाई।

नुकसान का आंकलन करना मुश्किल:- इतिहास में पहली बार आए ऐसे तूफान से हुए नुकसान का आंकलन करना मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक घरों, प्रतिष्ठानों पर लगे लाखों रुपए के सौर प्लेटो के भारी भरकम स्ट्रक्चर इंग्लो सहित ताश के पत्तो की तरह उड़कर दूर जा गिरे। पूर्व उप प्रधान बजरंग सिंह राणावत ने बताया कि भवन के ऊपर लगा स्ट्रक्चर इंग्लो सहित 300 फिट दूर बाड़े में जा गिरा। राम प्रसाद हेड़ा ने बताया कि उड़ता स्ट्रक्चर मेरे भवन की दीवार से बंब की तरह भेद कर खड्डा कर दिया और पास में जा गिरा। प्रतापपुरा मार्ग पर बह्मा एग्रो मील सहित अन्य व्यवसायिक, औद्योगिक इकाइयों को हुए करोड़ों के नुकसान का आंकलन भी नहीं हो पा रहा। निष्क्रिय प्रशासन सक्रिय होता तो इसका आंकलन हो पाता। दीवार गिरने से पशुपालक घायल, पशुओं की बचाई जान:- तूफान के दौरान रहड़ गांव में रामजस जाट अपने घर के पास पक्के बाड़े में अपने 11 गायों पशुधन के साथ था इस दौरान लंबा चौड़ा लोहे के चादर लगा पक्का बाड़ा ढह गया। इस हादसे में पशुओं के साथ जाट भी दब गया। ग्रामीणों ने पशुओं की जान बचाते हुए घायल जाट को शाहपुरा जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया। भी इसी गांव में पप्पू जाट, कालू जाट, भंवर तेली के बाड़ों, मकानों के चद्दर उसके खेतों में जा गिरे लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई।

Dev Krishna Raj Parashar - Shahpura

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *