स्वच्छता फंड के दुरुपयोग पर पंचायतीराज विभाग सख्त, कई प्रशासक पदमुक्त

स्वच्छता फंड के दुरुपयोग पर पंचायतीराज विभाग सख्त, कई प्रशासक पदमुक्त
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जयपुर। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के लिए आवंटित फंड के प्रभावी उपयोग में लापरवाही पर पंचायतीराज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग द्वारा की जा रही सख्ती के तहत अब तक कई ग्राम पंचायत प्रशासकों को फंड की उपलब्धता के बावजूद कार्य न कराने पर पदमुक्त किया जा चुका है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर द्वारा खुद भी कई जिलों में औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने चित्तौड़गढ़ जिले की अनेक ग्राम पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कई स्थानों पर स्वच्छता के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई गईं, जबकि संबंधित ठेकेदारों को भुगतान किया जा चुका था।

प्रशासकों पर कार्रवाई, तर्कों को नहीं मिली मान्यता

स्वच्छता व्यवस्था में अनियमितता की शिकायतों के बाद जब विभाग ने प्रशासकों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की, तो सरपंचों और ग्राम सेवकों ने विभाग के समक्ष विभिन्न स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए। उनका कहना था कि टेंडर प्रक्रिया में बाधाएं, श्रमिकों की अनुपलब्धता और बाहरी ठेकेदारों की निष्क्रियता के कारण कार्य प्रभावित हुआ।

कई मामलों में यह भी पाया गया कि एक ही ठेकेदार को अनेक पंचायतों में सफाई का कार्य सौंपा गया, लेकिन उन्होंने न तो सफाई कार्य करवाया और न ही निगरानी की। ऐसे मामलों में ग्राम पंचायत स्तर पर कामकाज केवल कागजों तक ही सीमित रह गया।

मंत्री के निर्देश पर सख्त निगरानी शुरू

पंचायतीराज मंत्री ने अपने निरीक्षण के दौरान दोषी ठेकेदारों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग अब सभी जिलों में स्वच्छता कार्यों की गहन मॉनिटरिंग कर रहा है। जिन पंचायतों को 15वें वित्त आयोग से स्वच्छता मद में बजट मिला था, वहां भी खर्च के अभाव या दुरुपयोग की स्थिति में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सतत निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। सरपंचों और ग्राम सेवकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्य निष्पादन करें, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

admin - awaz rajasthan ki

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