राजस्थान की सियासत में बड़े उलटफेर के संकेत: अंता उपचुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक बदलाव तय
जयपुर (प्रतीक पाराशर ): राजस्थान में राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक बड़े बदलावों के संकेत मिल रहे हैं। मुख्य सचिव सुधांशु पंत के दिल्ली तबादले और 14 नवंबर को होने वाले अंता उपचुनाव ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक फेरबदल के जरिए नई रफ्तार पकड़ने वाली है।
मुख्य सचिव पद पर कौन? प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी
मुख्य सचिव सुधांशु पंत के दिल्ली तबादले के बाद अब राज्य को एक नए प्रशासनिक मुखिया की तलाश है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ऐसे अधिकारी को प्राथमिकता देंगे जो केंद्र सरकार के मंत्रालयों से बेहतर तालमेल रखे और राज्य के विकास कार्यों को तेज गति दे सके।
मुख्य सचिव पद के प्रमुख दावेदार:
- वरिष्ठ अधिकारी: श्रीनिवास, एसीएस अभय कुमार, रजत मिश्रा
- अन्य दावेदार: एसीएस अखिल अरोड़ा, शिखर अग्रवाल और आनंद कुमार
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से कोई अप्रत्याशित नाम (जैसे तन्मय कुमार) भी प्रशासनिक मुखिया के तौर पर आ सकता है। यह प्रशासनिक बदलाव राज्य की योजनाओं में नई जान फूंकने के लिए महत्वपूर्ण है।
मंत्रिमंडल विस्तार की रूपरेखा
राज्य मंत्रिमंडल में वर्तमान में 24 मंत्री हैं, जबकि कुल सीमा 30 की है—यानी छह जगहें खाली हैं। मुख्यमंत्री दिसंबर में सरकार के दो साल पूरे होने से पहले अपनी टीम को मजबूत करना चाहते हैं।
- आधार: यह विस्तार जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
- गुजरात मॉडल: भाजपा गुजरात मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत सभी मंत्रियों से इस्तीफ़ा लेकर चुनिंदा चेहरों को नई ज़िम्मेदारियाँ दी जा सकती हैं।
- उद्देश्य: इस कदम से संगठन के समीकरण सधेंगे और युवा एवं अनुभवी चेहरों को जगह मिलेगी।
संगठन में भी दिखेगा तालमेल
भाजपा की लगभग 30 सदस्यों वाली प्रदेश कार्यकारिणी की सूची भी जल्द घोषित हो सकती है, जिसमें युवा नेताओं और अनुभवी चेहरों का अच्छा तालमेल होगा। पार्टी का लक्ष्य बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करना है। इसके अलावा, बोर्ड, आयोग और निगमों में लंबित राजनीतिक नियुक्तियां भी की जाएंगी, जिससे वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को जगह मिलेगी।
अंता उपचुनाव होगा निर्णायक
14 नवंबर को अंता उपचुनाव के नतीजे इन सभी बदलावों के लिए निर्णायक मोड़ साबित होंगे। भाजपा इसे लिटमस टेस्ट मान रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात भी इन फेरबदलों की रणनीति में अहम मानी जा रही है। दिसंबर से पहले राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में बड़ा बदलाव लगभग तय है।
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