ग्राम विकास अधिकारियों पर काम का बोझ, तनाव के चलते दौ ने की आत्महत्याग्राम विकास अधिकारी संघ ने कलेक्टर व सीईओ को सौंपा ज्ञापन

ग्राम विकास अधिकारियों पर काम का बोझ, तनाव के चलते दौ ने की आत्महत्याग्राम विकास अधिकारी संघ ने कलेक्टर व सीईओ को सौंपा ज्ञापन
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ग्राम विकास अधिकारियों पर काम का बोझ, तनाव के चलते दौ ने की आत्महत्या
ग्राम विकास अधिकारी संघ ने कलेक्टर व सीईओ को सौंपा ज्ञापन

– आवाज राजस्थान की –
प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत ग्राम विकास अधिकारी काम के बोझ के कारण मानसिक तनाव में हैं। हालात यह है कि पिछले 40 दिनों में दो ग्राम विकास अधिकारियों मे आत्महत्या कर ली। दिवंगत हुए दोनों विकास अधिकारियों को संघ की ओर से श्रंद्धाजलि दी गई। ग्राम विकास अधिकारी संघ के प्रदेश महामंत्री शिवराज चौधरी ने बताया कि आनलाइन पोर्टल पर हाथोहाथ रिपोर्ट मांगी जाती है जबकि अनेक पंचायतों में न तो संसाधन है और न ही नेटवर्क व अन्य विभागों के कार्य भी ग्राम विकास अधिकारियों से करवाए जा रहे है। पंचायतों में विकास कोष भी खाली है। सरकार लगातार शिविरों का आयोजन कर रही है, ग्राम विकास अधिकारी व्यवस्था कैसे करें। चौधरी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश ग्राम विकास अधिकारी तनाव में कार्य कर रहे हैं। चौधरी ने बताया कि पंचायत समिति शाहपुरा में कार्यरत ग्राम विकास अधिकारी शंकरलाल मीना पर ग्राम पंचायत गिरडीया में अनाधिकृत व्यक्तियों व विभागीय अधिकारियों द्वारा लम्बे समय से अनुचित कार्य करवाने का दबाव डाला जी रहा था। जिसकी सूचना उच्च अधिकारियों को मृतक साथी व परिजनों द्वारा मौखिक व लिखित रूप से बार-बार दी गई किन्तु जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस प्रशासनिक प्रताडऩा एवं मानसिक उत्पीडन के कारण शंकरलाल मीणा अत्यधिक तनावग्रस्त हो गया और लगभग तीन माह से मानसिक अवसाद में थे। इस संबंध में संगठन द्वारा भी पंचायत समिति स्तरीय अधिकारियों को अवगत करवाया गया लेकिन इसका कोई निराकरण नहीं किया गया जिसके कारण मानसिक दबाव मेें शंकरलाल मीणा ने आत्महत्या जैसा हृदयविदारक कदम उठाते हुए अपने घर पर 11 नवम्बर को फांसी के फंदे से झूलकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह आत्महत्या नहीं है यह कुछ लोगों द्वारा की गई जघन्य हत्या है। एक ईमानदार ग्राम विकास अधिकारी को इसप्रकार राजनैतिक व प्रशासनिक प्रताडऩा में अपनी जान गंवानी पड़ी, जो व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। विगत 15 दिवस में यह दूसरी घटना है जिसमें ग्राम विकास अधिकारी द्वारा आत्महत्या जैसा हृदय विदारक कदम उठाया गया है। इससे पूर्व 27 अक्टूबर 2025 को पंचायत समिति केकड़ी जिला अजमेर में भी ग्राम विकास अधिकारी स्व. प्रवीण कुमार कुमावत ने मानसिक अवसाद में फांसी से झूलकर अपनी जीवन लीला समाप्त की है। इन घटनाओं से प्रदेश के 10 हजार ग्राम विकास अधिकारियों में जबरदस्त आक्रोश एवं निराशा व्याप्त है। ग्राम विकास अधिकारयिों ने सीईओ रामप्रकाश तथा जिला कलेक्टर लोकबन्धु को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

admin - awaz rajasthan ki

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