दूध की धारा रुकने से पहले जागे सरकार” — ईरान-अमेरिका-इजराइल टकराव से गैस संकट, डेयरी को “अत्यावश्यक सेवा” (Essential Service) मानकर LPG/PNG दे सरकार : रामचन्द्र चौधरी”

दूध की धारा रुकने से पहले जागे सरकार” — ईरान-अमेरिका-इजराइल टकराव से गैस संकट, डेयरी को “अत्यावश्यक सेवा” (Essential Service) मानकर LPG/PNG दे सरकार : रामचन्द्र चौधरी”
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“दूध की धारा रुकने से पहले जागे सरकार” — ईरान-अमेरिका-इजराइल टकराव से गैस संकट, डेयरी को “अत्यावश्यक सेवा” (Essential Service) मानकर LPG/PNG दे सरकार : रामचन्द्र चौधरी”
“दूध केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि हर घर की दैनिक जरूरत है — इसकी निर्बाध आपूर्ति के लिए डेयरी क्षेत्र को “अत्यावश्यक सेवा” (Essential Service) माना जाए।”
अजमेर, 10 मार्च।
अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पैदा हो रही गैस आपूर्ति की समस्या को लेकर सरकार को सचेत करते हुए डेयरी क्षेत्र को LPG एवं PNG गैस की नियमित आपूर्ति और प्राथमिकता देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, विशेष रूप से Iran, United States और Israel के बीच चल रहे टकराव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और गैस बाजार पर असर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव भारत के कई उद्योगों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में डेयरी जैसे आवश्यक क्षेत्र को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
रामचन्द्र चौधरी ने कहा कि “दूध केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि हर घर की दैनिक जरूरत है — इसकी निर्बाध आपूर्ति के लिए डेयरी क्षेत्र को Essential Service माना जाए।” दूध और दुग्ध उत्पाद करोड़ों लोगों के दैनिक भोजन का हिस्सा हैं। इसलिए डेयरी क्षेत्र को Essential Service मानते हुए चिकित्सा और शिक्षा विभाग की तरह गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अजमेर दुग्ध संघ के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने कहा कि जब Essential Services Maintenance Act, 1968 (ESMA) लागू किया गया था, उस समय देश में डेयरी व्यवसाय और सहकारिता क्षेत्र की केवल प्रारंभिक शुरुआत ही हुई थी, इसलिए उस दौर में डेयरी उद्योग को इस कानून के अंतर्गत शामिल नहीं किया जा सका। लेकिन वर्तमान समय में परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। आज भारत, विश्व में दुग्ध उत्पादन के मामले में प्रथम स्थान पर है और देश की पोषण व्यवस्था तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। चौधरी ने कहा कि डेयरी उद्योग में दूध के प्रसंस्करण, पाश्चुरीकरण, उबालने तथा अन्य उत्पादन प्रक्रियाओं के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में PNG और LPG गैस की आवश्यकता पड़ती है। केवल Rajasthan में ही डेयरी क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 17 हजार मीट्रिक टन गैस की खपत होती है। यदि डेयरी व्यवसाय को ESMA के अंतर्गत अत्यावश्यक सेवा के रूप में शामिल नहीं किया गया और गैस आपूर्ति को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो इसका सीधा प्रभाव दूध के उत्पादन और आपूर्ति पर पड़ेगा तथा दूध के विक्रय मूल्य में भी भारी वृद्धि होने की आशंका रहेगी। उन्होंने कहा कि देश में श्वेत क्रांति ने किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, इसलिए डेयरी क्षेत्र को भी चिकित्सा और शिक्षा की तरह समान महत्व देते हुए इसे अत्यावश्यक सेवा के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, ताकि दूध और दुग्ध उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे और दुग्ध उत्पादकों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं के हित भी सुरक्षित रह सकें।उन्होंने बताया कि डेयरी उद्योग में दूध के प्रसंस्करण, पाश्चुरीकरण, उबालने और पैकिंग की पूरी प्रक्रिया में गैस का महत्वपूर्ण उपयोग होता है। यदि गैस की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर दूध के उत्पादन और आपूर्ति पर पड़ सकता है। चौधरी ने चेताया कि यदि डेयरी क्षेत्र की जरूरतों को समय रहते नहीं समझा गया तो इसका असर दुग्ध उत्पादक किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा, क्योंकि दूध जैसी आवश्यक वस्तु की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। अजमेर डेयरी अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान सहित पूरे देश में करोड़ो किसान और पशुपालक डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है और किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए सरकार को चाहिए कि डेयरी उद्योग को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर इसे मजबूत बनाए, ताकि किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे और उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध सस्ती दर पर निरंतर आपूर्ति मिलती रहे।
“दुग्ध सहकारिता में अनुभव जरूरी, “दो बच्चों की सीमा” से डेयरी क्षेत्र को बाहर किया जाए : रामचन्द्र चौधरी”
इसके साथ ही रामचन्द्र चौधरी ने सहकारिता विभाग में भी पंचायती राज एवं स्थानीय निकायों की भांति लागू दो बच्चों की सीमा (Child Limit) के नियम पर भी पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस नियम के कारण कई अनुभवी और किसान हितैषी लोग सहकारी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व करने से वंचित रह जाते हैं। यदि डेयरी सहकारिता क्षेत्र को इस नियम से छूट दी जाती है तो अनुभवी लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और दुग्ध उत्पादक किसानों के हितों की बेहतर ढंग से पैरवी हो सकेगी। चौधरी ने स्पष्ट कहा कि डेयरी क्षेत्र को मजबूत करना केवल किसानों का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का हित है, क्योंकि इससे जुड़े निर्णय सीधे दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार समय रहते इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और डेयरी क्षेत्र को आवश्यक सुविधाएं प्रदान कर किसानों तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करेगी।

admin - awaz rajasthan ki

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