जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग ने जलग्रहण परियोजनाओं के तहत प्रस्तावित कार्यों के IWMS पोर्टल पर परीक्षण एवं अनुमोदन की प्रक्रिया में आंशिक संशोधन किया
जियोटैग कार्यों की मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव, अब समयबद्ध होगी तकनीकी जांच
IWMS पोर्टल पर निर्णय प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण, जिला स्तर पर 3 और संभाग स्तर पर 5 दिन की समय-सीमा तय
जयपुर। जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग ने जलग्रहण परियोजनाओं के तहत प्रस्तावित कार्यों के IWMS पोर्टल पर परीक्षण एवं अनुमोदन की प्रक्रिया में आंशिक संशोधन किया है। विभाग की निदेशक एवं पदेन विशिष्ट शासन सचिव कल्पना अग्रवाल ने इस संबंध में परिपत्र जारी कर कार्यों के परीक्षण एवं स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक त्वरित और विकेंद्रीकृत करने के निर्देश दिए हैं।
नए प्रावधानों के अनुसार परियोजना अथवा ब्लॉक स्तर पर संबंधित अभियंता मौके का निरीक्षण कर कार्य की वास्तविक आवश्यकता और परियोजना सीमा का प्रारंभिक आकलन करेंगे। साइट की उपयुक्तता से संतुष्ट होने के बाद अधिकृत मोबाइल ऐप से कार्य को जियोटैग कर तकनीकी मापदंड, मात्रा और अनुमानित लागत पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित कार्य किसी पूर्व स्वीकृत अथवा मौजूदा कार्य का दोहराव नहीं है।
*5 लाख तक के कार्यों की जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता की
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जिला स्तर पर प्रस्तावित कार्यों की तकनीकी फिजिबिलिटी, हाइड्रोलॉजिकल प्रभाव, स्वीकृत योजना के प्रावधानों से अनुरूपता तथा गैर-दोहराव की जांच होगी। 5 लाख रुपये तक लागत वाले कार्यों की जांच की पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिशासी अभियंता की होगी, जबकि 5 लाख रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों का परीक्षण अधिशासी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता संयुक्त रूप से करेंगे।
10 लाख तक संभाग स्तर पर अंतिम अनुमोदन
परिपत्र के अनुसार 10 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए संभाग स्तर पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता अंतिम अनुमोदन प्राधिकारी होंगे। वे तकनीकी मानदंडों के अनुपालन, लागत की तर्कसंगतता और जिला स्तर से प्राप्त प्रमाणपत्र/टिप्पणी के आधार पर कार्य को अनुमोदित, सुधार के लिए ब्लॉक स्तर पर वापस अथवा कारण दर्ज करते हुए निरस्त कर सकेंगे। 10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले मामलों को संभागीय परीक्षण के बाद अंतिम निर्णय के लिए राज्य स्तर पर भेजा जाएगा।
*जांच के लिए तय हुई समय-सीमा
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विभाग ने IWMS पोर्टल पर त्वरित निर्णय के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की है।
जिला स्तर पर अधिकतम 3 कार्य दिवस
संभाग स्तर पर अधिकतम 5 कार्य दिवस
10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले मामलों में राज्य स्तर पर अधिकतम 7 कार्य दिवस
विभाग ने सभी अधिकारियों को इन समय-सीमाओं का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
अनुमोदित कार्यों की रैंडम तकनीकी जांच भी होगी
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पीएफसी एवं जीआईएस शाखा द्वारा संभाग स्तर से अनुमोदित कुछ जियोटैग कार्यों का रैंडम आधार पर तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। वहीं पोर्टल पर अनुमोदित कार्य की लागत में 10 प्रतिशत से अधिक का संशोधन राज्य स्तर से ही किया जा सकेगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये दिशा-निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। निर्धारित समय-सीमा के पालन में शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।