राजस्थान में पंचायत और जिला परिषद चुनाव ‘हाईजैक’ करने की कोशिश, परिसीमन का अंतिम प्रकाशन रोका – डोटासरा
जयपुर।
राजस्थान में पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने राज्य सरकार पर पंचायत और जिला परिषद चुनावों को जानबूझकर रोकने, परिसीमन प्रक्रिया में अनियमितता करने और प्रशासनिक अधिकारियों पर मौखिक दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा का कहना है कि सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर पंचायत और जिला परिषदों पर एकतरफा नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
समय-सीमा तय होने के बावजूद अंतिम प्रकाशन नहीं
डोटासरा ने बताया कि राज्य सरकार ने स्वयं पंचायती राज परिसीमन की समय-सीमा निर्धारित की थी। 17 दिसंबर 2025 को जारी अधिसूचना में स्पष्ट निर्देश थे कि दो सप्ताह के भीतर जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत वार्डों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। नियमानुसार 7 जनवरी तक आपत्तियां ली जानी थीं और 8 जनवरी को अंतिम प्रकाशन होना था। इसके बावजूद 20 जनवरी तक किसी भी जिले में वार्डों का अंतिम प्रकाशन नहीं किया गया।
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी हस्तक्षेप का आरोप
डोटासरा ने आरोप लगाया कि 31 दिसंबर 2025 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ किए जाने और हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद परिसीमन प्रक्रिया को रोक दिया गया। नियमों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद परिसीमन में बदलाव नहीं किया जा सकता, फिर भी प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप किया गया।
अधिकारियों पर मौखिक दबाव के आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि जिला कलेक्टरों और एसडीएम को मौखिक निर्देश देकर अंतिम प्रकाशन रोकने को कहा गया। लिखित आदेश न होने के बावजूद अधिकारी दबाव में कार्य कर रहे हैं, जिससे संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने अधिकारियों से कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप निष्पक्ष कार्य करने की अपील की।
वार्डों की आबादी में असंतुलन का आरोप
कांग्रेस ने परिसीमन में राजनीतिक लाभ के लिए जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने के आरोप भी लगाए। कई क्षेत्रों में 6 से 7 हजार की आबादी वाले वार्ड बनाए गए हैं, जबकि कुछ वार्डों में 15 हजार से लेकर 60–70 हजार तक की आबादी दर्शाई गई है। आरोप है कि अल्पसंख्यक बहुल और विपक्ष समर्थित क्षेत्रों में जानबूझकर असंतुलन पैदा किया गया।
वोटर लिस्ट और SIR प्रक्रिया पर सवाल
डोटासरा ने कहा कि अंतिम प्रकाशन न होने के कारण प्रपत्र A-1 तैयार नहीं हो पा रहा है, जिससे मतदाता सूची निर्माण की प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसके बावजूद पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही SIR प्रक्रिया में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की कि वे किसी भी गैर-कानूनी दबाव में न आएं और निर्वाचन आयोग तथा 17 दिसंबर की अधिसूचना के अनुसार ही कार्य करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही वार्डों का अंतिम प्रकाशन नहीं किया गया, तो पार्टी को जनआंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।