पंचायतीराज में आरक्षण की 50% सीमा पर कानूनी पेच, सरकार से जवाब तलबराजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई, 23 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
पंचायतीराज में आरक्षण की 50% सीमा पर कानूनी पेच, सरकार से जवाब तलब
राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई, 23 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
जोधपुर। राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव से पहले आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है। पंचायतीराज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के लिए 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण किए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल एवं न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार को नोटिस स्वीकार करने के निर्देश दिए।
याचिकाकर्ता कमलेश कुमार की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने पैरवी करते हुए पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 15(5), 15(6) एवं 16(5) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। याचिका में तर्क दिया गया है कि महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 243डी के तहत तय 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो गया है।
41 में से 31 सीटें आरक्षित करने पर उठाए सवाल
याचिका में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की ओर से 10 और 13 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार, जिला परिषदों की 41 सीटों में से 31 सीटें विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के लिए निर्धारित की गई हैं। वहीं, प्रमुख पदों पर करीब 76 प्रतिशत आरक्षण किए जाने का दावा करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत बताया गया है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाईकोर्ट नगरपालिकाओं में इसी प्रकार के समानांतर प्रावधानों को पूर्व में निरस्त कर चुका है। ऐसे में पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण की निर्धारित सीमा को लेकर उठाए गए सवालों पर अब राज्य सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
23 सितंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण की वैधानिकता को लेकर दायर इस याचिका पर 23 सितंबर को होने वाली सुनवाई में राज्य सरकार का जवाब सामने आने की संभावना है। ऐसे में आगामी सुनवाई पर पंचायतीराज चुनाव की तैयारियों और आरक्षण व्यवस्था के संदर्भ में निगाहें रहेंगी।