सरपंच चुनाव लड़ना है तो पहले छोड़नी होगी प्रशासक की कुर्सी
नामांकन से पहले इस्तीफा मंजूर होकर पदमुक्त होना जरूरी
जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच निवर्तमान सरपंचों के लिए चुनाव लड़ने से पहले प्रशासक पद छोड़ना जरूरी हो गया है। ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे निवर्तमान सरपंच यदि आगामी चुनाव में दोबारा सरपंच पद के लिए मैदान में उतरना चाहते हैं, तो उन्हें नामांकन दाखिल करने से पहले प्रशासक पद से विधिवत पदमुक्त होना होगा।
सिर्फ इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। यदि नामांकन दाखिल करने की तारीख तक इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ और संबंधित व्यक्ति प्रशासक के पद पर बना रहा, तो नामांकन पत्र खारिज होने की स्थिति बन सकती है।
10,290 ग्राम पंचायतों में प्रशासक संभाल रहे कामकाज
प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में निवर्तमान सरपंचों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई थी। फिलहाल 10,290 ग्राम पंचायतों में निवर्तमान सरपंच प्रशासक के तौर पर पंचायतों का कामकाज संभाल रहे हैं।
जिला कलेक्टर कर सकते हैं इस्तीफा स्वीकार
राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों में प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे निवर्तमान सरपंचों के चुनाव लड़ने की स्थिति स्पष्ट की गई है। पंचायती राज विभाग के 31 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार प्रशासकों के स्वैच्छिक इस्तीफे के मामलों में संबंधित जिला कलेक्टर इस्तीफा स्वीकार कर पदमुक्त करने के आदेश जारी कर सकते हैं।
सरकार की ओर से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों को एक साथ हटाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
15 दिन की प्रक्रिया अहम
पंचायती राज अधिनियम की धारा 36 में निर्वाचित सरपंच सहित विभिन्न पदाधिकारियों के इस्तीफे की प्रक्रिया का प्रावधान है। इसके तहत सरपंच अपना इस्तीफा विकास अधिकारी को संबोधित कर सकता है। सामान्य स्थिति में इस्तीफा प्राप्त होने के 15 दिन बाद प्रभावी होता है, यदि इस अवधि के दौरान इस्तीफा वापस नहीं लिया जाता।
ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक निवर्तमान सरपंचों के लिए इस्तीफा देने और उसके प्रभावी होने का समय महत्वपूर्ण हो गया है। नामांकन से पहले प्रशासक पद से विधिवत पदमुक्त होना चुनावी प्रक्रिया में उनकी पात्रता के लिहाज से अहम रहेगा।