अधिवक्ताओं ने शाहपुरा, फुलियाकलां में न्यायिक कार्यों का किया बहिष्कार।
अधिवक्ताओं ने शाहपुरा, फुलियाकलां में न्यायिक कार्यों का किया बहिष्कार।
उपखंड मजिस्ट्रेट की कार्यशैली पर अधिवक्ताओं ने उठाए सवाल।
एसडीएम ने कहा वकीलों का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं, अशोभनीय है।
शाहपुरा 15 मई। अभिभाषक संस्था, शाहपुरा के अधिवक्ताओं ने शाहपुरा व फुलियाकलां उपखंड अधिकारी की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े करते हुए शाहपुरा तथा फुलियाकलां उपखंड न्यायालय कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। अधिवक्ताओं ने जिला कलक्टर व राजस्व मंडल, अजमेर को लिखित पत्र भेज कर इस मामले से अवगत करवाते हुए न्यायोचित कार्रवाई की मांग की।
अभिभाषक संस्था सहसचिव कमलेश मुंडेतिया ने बताया कि दोनों उपखंड न्यायालयों के बहिष्कार करने का निर्णय 14 मई को संस्था अध्यक्ष दुर्गा लाल राजौरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। अध्यक्ष राजौरा ने बताया कि फुलिया कलां के उपखंड अधिकारी बाबूलाल को शाहपुरा उपखंड कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है। वकीलों का आरोप है कि एसडीएम की मनमानी और असहयोगात्मक रवैये से न्याय प्रक्रिया में देरी और परेशानी बढ़ रही है। तीन महीने से नए दावे दर्ज नहीं हो रहे, किसानों के पत्थरगड्डी और खेतों के रास्तों के प्रार्थना पत्र लटकाए जा रहे हैं। एसडीएम द्वारा रजिस्टर्ड एडी से तामील का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, जो सीपीसी नियमों के खिलाफ है। वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिवक्ताओं को एकसाथ उपस्थित होने का फरमान और गैर-हाजिरी पर पत्रावली खारिज करने की धमकी दी जा रही है, जबकि वे अन्य न्यायालयों में भी कार्यरत रहते हैं। एसडीएम से वकीलों के सामूहिक मुलाकात के दौरान भी उनके उदासीन रवैये के चलते अधिवक्ता नाराज हो गए और वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकचंद नौलखा, उपाध्यक्ष गजेंद्र प्रताप सिंह राणावत सचिव वीरेंद्र पत्रिका सहसचिव कमलेश मुंडेतिया कोषाध्यक्ष तेज प्रकाश पाठक वरिष्ठ देवता त्रिलोकचंद नौलखा गोविंद सिंह हाडा कन्हैयालाल धाकड़ कल्याणमल धाकड़ अनिल शर्मा रामप्रसाद जाट कैलाश सुवालका पन्नालाल खारोल चावंड सिंह अक्षय राज रेबारी नमन ओझा लालाराम गुर्जर शिवराज कुमावत संजय हाडा अंकित शर्मा किशन खटीक सोहेल खान गणपत बंजारा पूरणमल खटीक अंकित मालू आदि वकील नारेबाजी कर एसडीएम के चैंबर से बाहर निकल गए।
इस दौरान अभिभाषक संस्था ने कार्य बहिष्कार का पत्र एसडीएम बाबूलाल को सौंपा और उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी।
इस बात से आहत अधिवक्ताओं ने कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लेते हुए यह भी निर्णय लिया कि जब तक एसडीएम की कार्यशैली में सुधार नहीं होगा, शाहपुरा और फुलिया कला में उपखंड न्यायालयों में बहिष्कार जारी रहेगा।
इनका कहना है: एसडीएम के तानाशाही रवैये के कारण काश्तकारों से लेकर कई परिवादियों के काम अटके है। पत्रावलियों को एक साथ रखकर अधिवक्ताओं नाजायज खड़ा रखते हैं, अधिवक्ताओं के प्रति व्यवहार भी ठीक नहीं है। 14 मई को अधिवक्तागण अपनी समस्या बता रहे थे अधिकारी ने अनसुना कर अपने चैंबर में चले गए। दुर्गा लाल राजौरा, शाहपुरा अभिभाषक संस्थाध्यक्ष।
6 माह से कोर्ट बंद था, 5 साल के लंबित प्रकरणों में पक्षकार को न्याय नहीं मिल पा रहा है। मई से प्रतिदिन एक सौ से ज्यादा अभियोग की सुनवाई की जारही है। वकीलों के आरोप मिथ्या है। वकील समय पर कोर्ट नहीं आते। सहयोग नहीं करते हुए अपनी मनमर्जी कर अधिकारी पर दबाव बनाते है। 14 मई को कोर्ट की प्रक्रिया को बाधित कर कार्यालय में हंगामा किया। अधिकारी की छवि खराब करने का कृत्य किया। वकीलों का यह व्यवहार अशोभनीय था।
बाबूलाल उपखंड मजिस्ट्रेट, शाहपुरा