हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन पर लगाई अस्थायी रोक
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर एक महत्त्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए नई अधिसूचना जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह निर्देश न्यायमूर्ति दिनेश मेहता की एकल पीठ ने याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जी.आर. पूनिया, अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित, और अधिवक्ता लक्ष्मी राठौड़ सहित अन्य अधिवक्ताओं ने मामले में प्रभावी पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि राज्य सरकार द्वारा दिनांक 10 जनवरी 2025 को जारी दिशा-निर्देशों और इसके बाद समय-समय पर जारी अन्य आदेशों का पालन नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तब तक नई ग्राम पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी नहीं कर सकती जब तक कि पुनर्गठन समिति द्वारा लिया गया निर्णय न्यायालय के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत नहीं किया जाता।
कोर्ट के समक्ष यह भी तथ्य सामने आया कि पुनर्गठन के कई प्रस्ताव मनमाने तरीके से तैयार किए गए हैं, जो न केवल ग्रामीणों के अधिकारों के खिलाफ हैं, बल्कि दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन करते हैं।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को जानकारी दी कि इस विषय में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति संबंधित ज़िलाधिकारियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों की जांच करेगी। साथ ही स्पष्ट किया गया कि कलेक्टर द्वारा भेजा गया प्रस्ताव अंतिम नहीं माना जाएगा, जब तक समिति की समीक्षा पूरी नहीं हो जाती।