स्वच्छता कार्यों में लापरवाही पर पंचायतीराज विभाग सख्त, प्रशासकों को किया पदमुक्त
जयपुर। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता कार्यों के फंड की राशि खर्च नहीं करने या दुरुपयोग करने पर पंचायतीराज विभाग ने ग्राम पंचायतों के प्रशासकों पर सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। विभाग अब तक कई प्रशासकों को राशि उपलब्धता के बावजूद खर्च नहीं करने पर पदमुक्त कर चुका है। प्रशासक लगाने के बाद पंचायतीराज विभाग का स्वच्छता कार्यों पर फोकस इतना बढ़ा हुआ है कि खुद पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ग्राम पंचायतों में औचक निरीक्षण कर हालात जान रहे हैं। दिलावर ने हाल ही में चित्तौड़गढ़ जिले में कई ग्राम पंचायतों में औचक निरीक्षण किया थे। इन ग्राम पंचायतों को 15वें वित्त
सरपंच दे रहे सफाई, विभाग ने नहीं माने तर्क
प्रशासकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई बढ़ी तो सरपंचों ने विभाग के सामने अपने बचाव में कई तर्क दिए, लेकिन विभाग ने मंत्री के निर्देशों के चलते इनके तर्कों को तरजीह अभी तक नहीं दी है। सरपंचों ने तर्क दिए हैं कि
आयोग से स्वच्छता कार्यों के लिए फंड मिला था और औचक निरीक्षण में साफ सफाई का काम काफी खराब हालत में मिला। ऐसे प्रकरणों की जांच की गई तो सामने आया कि कई जगह एक ही ठेकेदार ने 10-12 ग्राम पंचायतों की सफाई का ठेका ले
टेंडर प्रक्रिया में विभिन्न तरह की समस्याओं के कारण सफाई कार्योंमें परेशानी आ रही है। ग्राम पंचायतों के बाहरी ठेकेदारों को टेंडर मिल जाते हैं। वे ना तो सफाई करवाते हैं और ना ही मॉनिटरिंग करते हैं। ऐसी स्थिति
रखा है और मौके पर सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति नजर आई। जबकि इनको भुगतान किया जा रहा था। दिलावर ने अपने औचक निरीक्षण में ऐसे कई ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। ज्ञातव्य है कि ग्राम पंचायतों में स्वच्छता कार्यों
में सरपंचों और ग्राम सेवकों को ही काम संभालना पड़ता है। इस कारण मजदूरों के भुगतान में भी समस्या आती है। सरपंचों का कहना है कि पंचायतीराज विभाग सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रकरणों में निर्णय ले । को पूरा कराने की जिम्मेदारी सरपंच जो कि अब प्रशासक हैं और ग्राम सेवक के पास होती है। औचक निरीक्षण में कई जिलों में सफाई व्यवस्था में अनियमितताओं की पोल खुली तो अब सभी जिलों में विभाग इस मामले में गंभीरता से मॉनिटरिंग कर रहा है।