गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धा एवं सम्मान के साथ आयोजित हुआ गुरुवंदन कार्यक्रम , विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विभिन्न आश्रमों में संतों का लिया आशीर्वाद

गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धा एवं सम्मान के साथ आयोजित हुआ गुरुवंदन कार्यक्रम , विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विभिन्न आश्रमों में संतों का लिया आशीर्वाद
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अजमेर । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरुवार को जिले के विभिन्न स्थलों पर श्रद्धा एवं आध्यात्मिकता से ओतप्रोत गुरुवंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने धर्मगुरुओं, संत महात्माओं एवं पुजारियों का सम्मान कर सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को आत्मसात करते हुए उन्हें श्रीफल, शॉल एवं पुष्पमाला भेंट की तथा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से प्रेषित शुभकामना संदेश भी प्रदान किए। उन्होंने सन्तों का आशीर्वाद लिया।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने जयपुर में अमरापुर दरबार आश्रम में साईं भगतप्रकाशजी महाराज एवं संत मोनूराम का सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में संत 1008 सद्गुरु स्वामी टेऊँराम महाराज की पुण्य स्थली पर पहुंचकर देवनानी ने उनका स्मरण किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुओं एवं संतजनों के आशीर्वचनों से आत्मिक शांति, जीवन में संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
देवनानी ने पुरानी मंडी में रामद्वारा में 108 महंत स्वामी रामकिशोर जी महाराज,वैशाली नगर में प्रेम प्रकाश आश्रम में स्वामी ब्रह्मानंद शास्त्री महाराज एवं स्वामी रामप्रकाश महाराज तथा होलीदड़ा में नृसिंह देव मंदिर में महंत श्यामसुंदर महाराज का दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर अपने श्रद्धा भाव अर्पित किए एवं संत महात्माओं को श्रीफल, पुष्पमाला एवं शॉल भेंटकर अभिनंदन किया ।
देवनानी ने राजगढ़ स्थित प्राचीन भैरवधाम में पहुंचकर मुख्य उपासक चंपालाल महाराज का सम्मान किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संतजन समाज में भक्ति, सेवा एवं साधना की ज्योति प्रज्वलित करते हैं और उनके सान्निध्य से जनमानस को आत्मिक बल की अनुभूति होती है।
देवनानी ने कहा कि गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में सर्वाेच्च है। गुरुओं के बिना जीवन में दिशा, विवेक और ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। संत महात्मा समाज को आध्यात्मिक दृष्टि प्रदान करते है । साथ ही नैतिक मूल्यों एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल श्रद्धा की अभिव्यक्ति नहीं है। यह कृतज्ञता, भक्ति एवं आत्मिक संबंध का प्रतीक है। गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं और उनका सान्निध्य जीवन को सार्थक बनाता है।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

admin - awaz rajasthan ki

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