पंचायत चुनाव में मनरेगा बनेगा कांग्रेस का प्रमुख चुनावी हथियार, ग्राउंड लेवल पर शुरू हुआ जनसंपर्क अभियान
जयपुर प्रतीक पाराशर । राजस्थान में प्रस्तावित पंचायत चुनावों में मनरेगा में प्रस्तावित बदलाव कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति का केंद्र बिंदु बन गया है। पार्टी मनरेगा का नाम बदलने और नए कानून लाए जाने को ग्रामीण विरोध के मुद्दे के रूप में भुनाने की तैयारी में है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने प्रदेशभर में सम्मेलन, यात्राएं और घर-घर जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है।
प्रदेश कांग्रेस ने नए वर्ष की शुरुआत में वॉर-रूम स्तर पर चुनावी रोडमैप तैयार किया था, जिसे अब जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि 29 जनवरी तक राज्य की सभी 14 हजार से अधिक पंचायतों में जनसंपर्क और संवाद कार्यक्रम पूरे कर लिए जाएं। इसके बाद वरिष्ठ नेताओं — गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, अशोक गहलोत और सचिन पायलट — के दौरे प्रस्तावित हैं।
मनरेगा को चुनावी मुद्दा मान रही कांग्रेस
कांग्रेस का मानना है कि मनरेगा को हटाकर नए कानून को लागू करने का फैसला पंचायत चुनावों में तुरूप का इक्का साबित हो सकता है। अब तक करीब 9,500 पंचायतों में कार्यक्रम तय किए जा चुके हैं या पूर्ण हो चुके हैं। इन आयोजनों में ग्रामीणों को मनरेगा के पूर्व प्रावधानों से मिले लाभों की जानकारी दी जा रही है और नए कानून से संभावित प्रभावों पर चर्चा की जा रही है।
वॉर रूम कर रहा सतत मॉनिटरिंग
प्रदेश कांग्रेस महासचिव एवं मीडिया सेंटर चेयरमैन स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि सभी आयोजनों की रिपोर्ट वॉर रूम में एकत्र की जा रही है। प्रत्येक पंचायत से फोटो, वीडियो और कार्यकर्ता सहभागिता का डाटा संकलित किया जा रहा है। कितने कार्यकर्ता सक्रिय हैं और किस क्षेत्र में संगठन मजबूत है, इसकी नियमित समीक्षा की जा रही है। पूरी प्रक्रिया की सीधी मॉनिटरिंग डोटासरा कर रहे हैं।
प्रत्याशी चयन से भी जुड़ी रणनीति
कांग्रेस ने पंचायत से प्रदेश स्तर तक को-ऑर्डिनेशन कमेटियां गठित कर दी हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जो पंचायत स्तर पर बैठकों के माध्यम से सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान कर रहे हैं। यही कार्यकर्ता आगे चलकर पंचायत चुनाव में संभावित प्रत्याशी भी बन सकते हैं। इस तरह कांग्रेस एक साथ आंदोलन और प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस का यह व्यापक ग्रामीण संपर्क अभियान प्रभावी रहता है, तो पंचायत चुनावों में मनरेगा का मुद्दा मुख्य निर्णायक कारक बन सकता है।